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मूत्र संक्रमण को न करें नजरअंदाज, नहीं तो होगा खतरा
(आईएएनएस/आईपीएन)। मूत्र नली में संकुचन से हर आयु वर्ग के महिला-पुरुष प्रभावित होते हैं। इस बीमारी में पेशाब में जलन, रक्त और मवाद आने लगता है।
उत्तर प्रदेश में इस तरह के मामलों की संख्या हाल के कुछ वर्षो में जहां बढ़ी है, वहीं सबसे अहम बात है कि लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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इस बीमारी में लापरवाही बरतने पर संक्रमण से किडनी फेल होना तय है। यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय कुलकर्णी के मुताबिक, अगर पेशाब की धार कम हो जाए, पेशाब करने में अधिक समय और जोर लगाना पड़े तो समझ लें मूत्र-नलिका संकरी हो गई है।
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कई बार संक्रमण की वजह से मूत्र नलिका खराब हो जाती है। कभी-कभी यूरीन इंफेक्शन, चोट, पेशाब के रास्ते में लंबे समय तक नली पड़ने व असुरक्षित यौन संबंध से भी समस्या होती है। ऐसे में तत्काल यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें और यूरीन कल्चर कराएं।
डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि नए शोध में यह बात पता चला है कि मूत्र संक्रमण का इलाज यूरेथ्रोप्लास्टी विधि से सर्जरी संभव है। इस सर्जरी में मूत्र-नलिका का निर्माण गाल एवं होंठ के अंदर के ऊतक (म्यूकोजा) से किया जाता है।
इसके अलावा कभी भी तेज आई पेशाब को रोके नहीं, जब भी पेशाब लगे तुरंत जाएं वरना यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाएगा। संभोग के बाद हमेशा पेशाब करें और योनि को साफ करें। इससे ट्रैक में अगर कोई बैक्टीरिया होगा भी, तो वह साफ जो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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