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मॉनसून बिना बीमार पड़े कैसे रहें चुस्त-दुरूस्त
आयुर्वेद के अनुसार मॉनसून अथवा वर्षा ऋतु में तीन दोषों में वात दोष प्रमुख है। अतः वात दोष के कारण जो रोग होते है उनसे बचने के लिए वर्षा ऋतु में एक सामान्य उपचार किया जाता है।
- अभ्यंगम अथवा तेल मालिश
- मेडिकेटेड क्वाॅथ या हर्बल पावडर इत्यादि से स्वेदन अथवा गर्म उपचार
- तेल के साथ क्वाॅथ का बस्ति या एनेमा
अभ्यंगम से न केवल जोडों में दर्द से राहत मिलती है बल्कि यह त्वचा के लिए भी अच्छा है। अभ्यंगम में इस्तेमाल तेल से त्वचा मुलायम होती है और त्वचा को प्राकृतिक चमक मिलती है।

वैद्यकीय क्वाॅथ से भाप लेने से त्वचा के छिद्र खुलते है और यह विषाक्त को दूर करने में मदद करता है। यह जोड़ों में सूजन, कठोरता और दर्द मिटाता है एवं मांशपेसियों को राहत देता है।
एनेमा उपचार वात दोष के लिए विशेष उपचार है। तेल वस्तिकर्म या क्वाॅथ वस्तिकर्म से वात दोष की विषाक्तता एवं शमन (पैसिफिकेशन) में मदद मिलती है। पतरापोट्टली स्वेदन या चिक्तिसकीय हब्र्स की पत्तियों से तैयार गोली के साथ गर्म उपचार से गठिया, स्पांडिलोसिस इत्यादि में दर्द तथा सूजन से राहत मिलती है।

माॅनसून सीजन में प्रचलित आम रोगों जैसे कि कफ, सर्दी, सांस संबंधि इंफेक्शन, पीलिया इत्यादि से आयुर्वेद में निर्धारित खानपान का अनुसरण कर बचा जा सकता है।
यह भी आमतौर पर सलाह दी जाती है कि हल्दी पावडर के साथ गुनगुना दूध पिएं, जो गले में दर्द, कफ इत्यादि के लिए शानदार उपचार है।

तुलसी पत्ती एवं हल्दी के काढ़े से कुल्ला करने से भी गले के दर्द में राहत मिलती है। भाप लेने से नाक बंद से राहत मिलती है। सर्द हवाओं से हमेशा बचें, अपने सिर और कान को स्कार्फ से ढक कर रखें।

मॉनसून में खाने योग्य खाद्य पदार्थ
- अनाज- लाल चावल, साथी चावल, ज्वारी
- सब्जियां- लौकी, पडवल, भिंडी, डोडका, घोसाली (नेनुआ)
- फली-तूर दाल, हरा चना, कूलिथ, काला चना
- कंद-लहसुन, प्याज, अदरक, सूरन
- फल- खजूर, अंगूर, नारियल, शहतूत
- दूध एवं दूध उत्पाद- गाय का दूध, बटर मिल्क, घी
- अन्य चीजें- राॅक नमक, धनिया, जीरा (सफेद), गुड़, पुदीना, हींग, काली मिर्च, पीपर लोंगम (पिप्पली)
- पानी- उबला हुआ पानी, गुनगुना पानी

मॉनसून में क्या नहीं खाना चाहिये
- अनाज- वरी, रग्गी, बाजरी, मक्का, जौ
- सब्जियां- पालक, करेला, चवली, बंदगोभी, सूखी सब्जियां, जैक फ्रूट
- फली -मटकी, मटर, मसूर, चना
- कंद- आलू, सिंघाडा, साबुदाना, कमलकांडा, अरबी, गाजर
- फल- जाम्बूल, जैकफ्रूट, ककड़ी-खीरा,तरबूज, खरबूज
- दूध-भैंस का दूध, पियूष पनीर
- अन्य चीजें- मिठाई, जंक फूड, श्रीखंड
- पानी- ठंडा पानी, गैर उबला पानी
लेखक परिचय-
डां. शंकर कट्टेकोला,
एचओडी, आयुर्वेद एवं पंचकर्म विभाग, सोमैया आर्युविहार
डां. अदिति गाडगिल
आयुर्वेद फिजिसिया-सोमैया आयुर्वेद एवं पंचकर्म सेंटर, सोमैया आर्युविहार
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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