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अगर बार-बार शौंच जाना पड़ता है जरुर पढ़ें इस बीमारी के बारे में
क्या आप रोज़ दो बार या तीन बार मल त्याग करते हैं? इसके बाद क्या आप थका हुआ महसूस करते हैं? अगर हाँ, तो समय आ गया है कि आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम(आईबीएस) के बारे में जानें।
तब क्या होगा अगर घर से फ्रेश होकर निकलने के बावजूद आप किसी दोस्त की पार्टी में गए हुए हों और आपको वाशरूम जाने की इच्छा होती है!
यह काफी निराशाजनक हो सकता है। हालांकि, दिन में दो बार मल त्याग करना आम बात है, पर अगर आप तीन बार से ज़्यादा वाशरूम जा रहे हैं तो यह चिंता का विषय हो सकता है। और खासकर तब जब वाशरूम से निकलने के बाद आप थका हुआ महसूस करते हों।
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम ऐसी बीमारी है जिसमें बड़ी आंत पर असर पड़ता है और यह लाल हो जाती है जिससे कई बार डायरिया भी हो सकता है। अगर आईबीएस का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो कई बीमारियां जैसे आँतों का अलसर और कोलन कैंसर भी हो सकता है। इसलिए यहाँ पर आईबीएस के विषय में कुछ तथ्य बताये गए हैं जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए।

FACT 1
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का कारण अभी तक साफ नहीं है और इसका पता लक्षण को देखकर लगाया जाता है।

FACT 2
आईबीएस ऐसी बिमारी है जो आपके रोज़मर्रा के जीने के तरीके में गड़बड़ी आने से होती है। इसका मतलब है कि जो लोग इस बिमारी से पीड़ित हैं उन्हें अपने रहन सहन और खान पान में बदलाव लाने की ज़रुरत है।

FACT 3
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के कुछ आम लक्षण हैं पेट दर्द, पेट का फूलना, डायरिया और कब्ज़।

FACT 4
आमतौर पर पाए जाने वाले डायरिया से अलग, आईबीएस से पीड़ित लोग मल त्याग करने की प्रबल इच्छा से परेशान रहते हैं। धीरे धीरे यह आदत बन जाती है और व्यक्ति की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी ऐसी हो जाती है।

FACT 5
आईबीएस के बारे में एक सच्चाई यह है कि पीड़ित व्यक्ति जब भी कुछ खाता या पीता है उसे मल त्याग करनी की इच्छा होती है।

FACT 6
आईबीएस के बारे में यह भी कहा जाता है कि चूँकि पीड़ित कुछ समय के अंतराल में मल त्याग करता है तो उसके शरीर से कई पोषक तत्व ऐसे ही निकल जाते हैं। इससे उन्हें थकावट और कई और कमियां भी महसूस होती हैं।

FACT 7
एक शोध से पता चला है कि जो लोग ज़्यादा व्याकुल रहते हैं वह आईबीएस से ज़्यादा परेशान रहते हैं।

FACT 8
आईबीएस में इंसान को मल त्याग करनी की इच्छा तो हो रही होती है पर कई बार वह ऐसा कर नहीं पाता जिससे पेट की परेशानी बनी रहती है।

FACT 9
आईबीएस का कोई इलाज नहीं है पर खान पान और जीनी के तरीके में बदलाव कर इसके लक्षण पर नियंत्रण ज़रूर किया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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