Latest Updates
-
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व
प्लास्टिक वाली पानी की बोतल दोबारा इस्तेमाल करने से हो सकती हैं ये बीमारियां
प्लास्टिक की बोतलों में कुछ ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो हमारे शरीर के सिस्टम को प्रभावित करते हैं। डॉ. मर्लिन ग्लेनविले हमें इन चीजों के प्रति सावधान रहने की सलाह देते हैं।
भरपूर मात्रा में पानी पीना सेहत के लिए अच्छा है लेकिन पानी पीने के लिए बार-बार एक ही बोतल का इस्तेमाल करना स्वास्थ के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि जिस प्लास्टिक बोतल का आप लगातार इस्तेमाल पानी पीने के लिए करते हैं उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि कि यह पानी में केमिकल छोड़ता है जिससे पानी में खतरनाक बैक्टीरिया उत्पन्न होने लगते हैं।
खासतौर पर हमें बिस्फेनोल ए (बीपीए) नामक विवादस्पद केमिकल के प्रति ज्यादा सचेत रहना चाहिए, क्योंकि प्लास्टिक बनाने में इसी रसायन का सबसे ज्यादा उपयोग होता है और यह सेक्स हार्मोन्स में गड़बड़ी पैदा कर सकता है।

प्लास्टिक की बोतलों में कुछ ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो हमारे शरीर के सिस्टम को प्रभावित करते हैं। डॉ. मर्लिन ग्लेनविले हमें इन चीजों के प्रति सावधान रहने की सलाह देते हैं। यह स्त्रियों में प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है जिसकी वजह से स्त्रियों में पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस और स्तन कैंसर जैसी हार्मोनल समस्याएं और अन्य खतरे बढ़ जाते हैं।
माना जाता है कि साइंस से अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बीपीए मनुष्य को कैसे प्रभावित करता है। ऐसा माना जाता है कि बीपीए हार्मोन्स का अनुकरण करता है और शरीर में हार्मोन्स छोड़ने वाली ग्रंथियों के एंडोक्राइन सिस्टम (अंतःस्रावी तंत्र) में गड़बड़ी उत्पन्न कर देता है।

प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले लोगों का मानना है कि इसकी वजह से कई सारी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्लास्टिक के ज्यादा उपयोग से मनुष्य में ब्रेस्ट कैंसर, हृदय रोगों के साथ ही प्रजनन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
लेकिन इसके अलावा चिंता का दूसरा कारण यह है कि पानी के बोतल के ऊपर कई बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो कि स्वास्थ संबंधी समस्याएं उत्पन्न करते हैं।
ट्रेडमिल रिव्यू द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है एक एथटील द्वारा एक हफ्ते तक इस्तेमाल की गई पानी की बोतल का जब शोधकर्ताओं ने लैब में टेस्ट किया गया तो पाया कि बोतल पर बैक्टीरिया की मात्रा उम्मीद से बहुत ज्यादा थी। चिंता की बात है कि औसतन टॉयलेट सीट की तुलना में पानी की बोतलों पर बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा पायी गई। यह भी पाया गया कि पानी की बोतलों में पाए जाने वाले 60 प्रतिशत बैक्टीरिया आदमी को बीमार कर देते हैं।
बीमार होने से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
डिस्पोजेबल बोतलों का दोबारा इस्तेमाल न करें। एक बार उससे पानी पीने के बाद उसे रिसाइकल कर दें।
जहां तक संभव हो बीपीए मुक्त प्लास्टिक की बोतलें या कांच या स्टेनलेस स्टील से बनी बोतले खरीदें और इसका जितनी बार चाहें पानी पीने के लिए इस्तेमाल करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications