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स्ट्रेस या डिप्रेशन से छुटकारा पाना है तो ग्रीन थेरेपी अपनाएं
कई शोधों में इस बात की पुष्टि हुई है कि ग्रीन थेरेपी करने से स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों में कमी आती है।
आज कल की व्यस्त जीवनशैली और तमाम तरह की टेंशन की वजह से अधिकतर लोग स्ट्रेस की चपेट में आ जाते हैं।
अब तो वयस्कों के साथ साथ कॉलेज जाने वाले बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो अगले कुछ ही हफ़्तों में आप डिप्रेशन की चपेट में आ सकते हैं।
इससे बचने के लिए वैसे तो अब कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं लेकिन दवाइयों की बजाय आप थेरेपी से भी इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं।

थेरेपी कई तरह की हो सकती हैं जैसे कि ग्रीन थेरेपी या इको थेरेपी इत्यादि। इन सब थेरेपी का मूल मकसद होता है कि इंसान को प्रकृति के करीब लेकर जाना और इसका मरीज पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जब आप खुद को नेचर के करीब पाते हैं तो आपका मन अपने आप शांत होने लगता है और ये ग्रीन थेरेपी शहरों के साथ साथ अब गावों में भी उपलब्ध है। आइये जानते हैं ग्रीन थेरेपी से होने वाले फायदों के बारे में

एक्टिविटी :
एडवेंचर थेरेपी भी इको थरेपी का ही एक पार्ट है और इसमें रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रेकिंग इत्यादि शामिल है। इन एक्टिविटी को करने से दिमाग इन कामों में व्यस्त हो जाता है जिससे आप अपने दुःख या स्ट्रेस को भूल जाते हैं। साथ ही इन्हें करने से शरीर में ऐसे हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है जो ख़ुशी प्रदान करते हैं।

चिंता में कमी :
जब आप अकेले होते हैं तो आप बार बार उन्हीं चीजों को सोचने लगते हैं जो आपको परेशान करते हैं और इसी वजह से आपका स्ट्रेस और बढ़ता जाता है। लेकिन जब आप इन एक्टिविटी में भाग लेते हैं तो आपका दिमाग इन चीजों से भटक जाता है और ज्यादा समय नेचर के बीच बिताने से आप अपने आप ही शांत महसूस करने लगते हैं। जो लोग बहुत दिनों से स्ट्रेस या डिप्रेशन की चपेट में हैं उनके लिए यह ग्रीन थेरेपी बहुत फायदेमंद है।

रिलैक्स :
इन थेरेपी के अंतर्गत आप जो फिजिकल एक्टिविटी करते हैं उससे आपका तन और मन दोनों को शांति मिलती है साथ ही नयी जगह जाने से आप एक अलग तरह की उर्जा से भर जाते हैं। इसलिए कुछ महीनों के अंतराल पर हर आदमी को किसी नेचुरल जगह पर घूमने ज़रूर जाना चाहिए।

डिप्रेशन कम करने में मददगार :
कई शोधों में इस बात की पुष्टि हुई है कि ग्रीन थेरेपी करने से स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों में कमी आती है। इस थेरेपी में कई लोग ग्रुप में शामिल होते हैं और इसलिए जब आप अलग अलग तरह के लोगों से मिलते हैं तो आपको भी काफी कुछ सीखने को मिलता है। इससे आपका सोशल बिहैवियर भी बेहतर होता है।

बॉन्डिंग :
कुछ थेरेपी में जानवरों का भी इस्तेमाल किया जाता है और उसमें लोगों को कुछ समय कुत्तों और चिड़ियों के बीच बिताना पड़ता है जिससे कुछ देर में वे उनसे जुड़ाव भी महसूस करने लगते हैं। ऐसी एक्टिविटी आपको प्यार करना सिखाती हैं और धीरे धीरे आपका डिप्रेशन कम होने लगता है।

थेरेपी क्यों है ज़रूरी :
आज के समय में आप ग्रीन थेरेपी के महत्व को दरनिकार नहीं कर सकते हैं। लोग इस कदर अपने काम और पारिवारिक दिक्कतों से परेशान हैं कि वे हर समय स्ट्रेस से पीड़ित रहते हैं। ऐसे में ये थेरेपी वरदान की तरह काम करती है और कुछ ही दिनों में लोग अपने आप को पूरी तरह बदल हुआ पाते हैं। इसलिए अगर आप खुद स्ट्रेस के शिकार हों या आपके परिवार में कोई डिप्रेशन का मरीज हो तो एक बार उसे इस थेरेपी के बारे में ज़रूर बताएं।



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