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विश्व जनसंख्या दिवस : महिलाओं की प्रजनन सेहत का महत्व
हर साल आज के दिन विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है कि ताकि लोगों को विश्व की आबादी को लेकर जागरूक किया जा सके और उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बताया जा सके। इस साल विश्व जनसंख्या दिवस की थीम ' फैमिली प्लानिंग इज़ अ ह्यूमन राइट’ है।
इस दिन को मनाने का प्रमुख उद्देश्य विश्व की जनसंख्या को नियंत्रित करने की जरूरत और महत्व पर ध्यान देना है।

साथ ही इसके द्वारा प्रजनन स्वास्थ्य के विषय में जागरूकता भी फैलाना है।
विश्व जनसंख्या दिवस के उद्देश्य
- युवा लड़के और लड़कियों को सशक्त करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है।
- कम उम्र में गर्भावस्था से बचने के लिए युवाओं को उचित और युवा-अनुकूल तकनीकों के बारे में शिक्षित करना।
- समाज से लैंगिक रूढ़िवादी सोच को दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित करना।
- लड़कियों और लड़कों के लिए शिक्षा की जरूरत को सुनिश्चित करना।
- हर कपल तक प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना। यौन संक्रमित बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करना और उन्हें रोकने के तरीके बताना।
- कन्या बाल अधिकारों की रक्षा की मांग करना। यौन संबंधों के बारे में ज्ञान देना और शादी की जिम्मेदारियों के लिए तैयार होने तक का इंतजार करना।
क्या है प्रजनन स्वास्थ्य
प्रजनन स्वास्थ्य एक मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्थित है। इसे केवल प्रजनन रोगों के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। ये जीवन के सभी स्तरों पर प्रजनन प्रक्रिया, प्रणाली और व्यवस्था पर कार्य करता है।
प्रजनन सेहत के प्रकार
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार प्रजनन स्वास्थ्य के प्रकार हैं इस प्रकार हैं :
गर्भाश्य फाइब्रॉएड
प्रजनन की उम्र में महिलाओं में इस प्रकार का कैंसर होने का खतरा रहता है। गर्भाश्य के अंदर और उसकी आसपास की दीवार की मांसपेशियों की कोशिकाएं और अन्य टिश्यूज़ पर फ्राइब्रॉएड बनने लगते हैं। इसके लक्षणों में कमर दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेट का निचला हिस्सा भारी महसूस होना, माहवारी में दर्द होना, सहवास के दौरान दर्द, प्रजनन समस्याएं जैसे बांझपन और कई बार गर्भपात होना।
एंडोमेट्रिओसिस
ये एक प्रजनन विकार है जो महिलाओं के गर्भाश्य को प्रभावित करता है। एंडोमेट्रिओसिस गर्भाश्य में सामान्य टिश्यूज़ के बनने पर होता है या फिर ये टिश्यूज ओवरी औश्र गर्भाश्य, ब्लैडर और आंत में कहीं भी बन जाते हैं। ये टिश्यूज़ बांझपन, दर्द और भारी माहवारी का कारण बनते हैं।
एचआईवी/एड्स
एचआईवी संक्रमित पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने पर महिलाओं में भी एचआईवी वायरस संक्रमित हो जाता है। ये संक्रमण एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति पर प्रयोग की गई सुईं से भी फैल सकता है। गर्भवती महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए शिशु एचआईवी के संपर्क में ना आए। इसके खतरे से बचने के लिए डॉक्टर से चैकअप जरूर करवाते रहें।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
ये बीमारी तब होती है जब किसी महिलाकी ओवरी या एड्रेनल ग्लैंड सामान्य से ज्यादा मात्रा में पुरुष हार्मोन पैदा करने लगते हैं। इसकी वजह से ओवरी में सिस्ट बनने शुरु हो जाते हैं। मोटे लोगों में पीसीओएस का खतरा ज्यादा रहता है और इनमें ह्रदय रोग और मधुमेह का खतरा भी ज्यादा रहता है।
इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस
मूत्राशय में पैदा होने वाली ये एक गंभीर स्थिति है। इससे ग्रस्त लोगों को मूत्राशय की झिल्लियों में जलन और सूजन महसूस होती है जिसकी वजह से मूत्राशय सख्त होने लगता है। इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, पेट में दर्द रहना, मूत्राशय में बहुत ज्यादा दर्द महसूस होना शामिल है।
यौन हिंसा
भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में यौन हिंसा बड़ी तेजी से फैल रही है। यौन हिंसा एक यौन क्रिया है जिसमें दो लोगों की सहमति से संबंध नहीं बनते हैं। इसमें पुरुषों से ज्यादा महिलाएं पीडित होती हैं।
यौन संक्रमित रोग
बैक्टीरियल, वायरस और पैरासाइट्स यौन संक्रमित रोग का कारण है। आपको बता दें कि महिलाओं और पुरुषों में 20 तरह के एसटीडी रोग होते हैं।
प्रजनन स्वास्थ्य का महत्व
ये तथ्य लोगों की संतुष्टि और सुरक्षित यौन जीवन में निहित है। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना है कि महिलाएं प्रजनन से संबंधित निर्णय स्वयं और स्वतंत्र होकर लें। बचपन, किशोरावस्था और जवानी में प्रजनन सेहत बहुत महत्वपूर्ण होती है।
फैमिली प्लानिंग से प्रजनन सेहत कई मायनों में अलग है। बांझपन का ईलाज करना थोड़ा मुश्किल और महंगा है लेकिन प्रसव के दौरान और उसके बाद उचित सावधानी रखकर इससे बचा जा सकता है।
इसके अलावा ये स्तनपान के महत्व और प्रोत्साहन एवं कई तरीकों से प्रजनन सेहत पर इसके प्रभाव पर भी केंद्रित है। इसमें कुछ पोस्ट-पार्टम समस्याओं, ओवररी और स्तन कैंसर को रोकने और नवजात शिशु के स्वास्थ्य में सुधार शामिल है।
प्रजनन सेहत के अंतर्गत असुरक्षित गर्भपात, प्रजनन पथ संक्रमण, अवांछित गर्भावस्था, बांझपन, प्रजनन पथ कैंसर, लिंग आधारित हिंसा, कुपोषण और एनीमिया को भी शामिल करना चाहिए।
प्रजनन सेहत को प्रभावित करने वाले कारण
- आर्थिक परिस्थिति
- रोज़गार
- शिक्षा
- पारिवारिक माहौल
- सामाजिक और लिंग संबंध
इन बातों को भी जान लें
- विकासशील देशों में 214 मिलियन महिलाएं प्रजनन की उम्र में आधुनिक गर्भनिरोधक तकनीकों का इस्तेमाल नहीं करती हैं।
- परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक से असुरक्षित गर्भपात की संख्या को घटाया जा सकता है।
- कॉन्डम के इस्तेमाल से एचआईवी के संक्रमित होने से सुरक्षा मिलती है।
- अनपेक्षित गर्भावस्था को रोकने के लिए, मां और बच्चों की मौत से बचने के लिए परिवार नियोजन या गर्भनिरोधक की जरूरत है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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