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नाखून पार्लर के केमिकल की वजह से भी हो सकता है कैंसर
नाखून पार्लरों में हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों का स्तर तेल शोधन संयंत्र या मोटर वाहनों के गैरेज के बराबर होता है, जिससे वहां के कर्मचारियों को कैंसर होने, सांस लेने में परेशानी और त्वचा में जलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा एक रिसर्च में सामने आया है।
इस रिसर्च के दौरान छह नेल्स सलून में आसानी से वाष्प या गैस में तब्दील होने वाले कार्बानिक यौगिकों (वीओसी) पर करीबी नजर रखी गई। इस व्यवसाय में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे बताने वाला ये अभी तक का पहला शोध है। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर की एक टीम के अनुसार, नाखून पार्लरों में काम करने वाले कर्मियों के स्वास्थ्य को फर्मैल्डहाइड और बेंज़ीन जैसी गैसों से उत्पन्न प्रदूषकों के कारण अधिक खतरा होता है।

अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने पता लगाया है कि कैंसरकारी यौगिक के लंबे वक्त तक संपर्क में रहने से 'ल्यूकेमिया' और 'हॉडगिकिंग्स लिंफोमा' जैसे कैंसर होने का काफी खतरा बढ़ जाता है। मुख्य शोधार्थी लुपिता मोन्टोया ने बताया कि यह अध्ययन इस बारे में पहली बार ठोस साक्ष्य देता है कि इस तरह का वातावरण कर्मचारियों के लिए खतरनाक है और उनकी सुरक्षा के लिए बेहतर नीतियां बनाने की जरूरत है।
गर्भवती महिलाएं रहे सावधान
शोध में सामने आया है कि पार्लर जाने वाले लोगों को हालांकि ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है पर गर्भवती महिलाएं या अस्थमा के रोगियों को इससे खतरा हो सकता है। ऐसे में अगर आप गर्भवती है तो पार्लर जाने से बचे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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