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ल‍िंग पर सफेद दाग-धब्‍बे, जाने पेनाइल विटिल‍िगो के वजह और इलाज के बारे में

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विटिल‍िगो एक ऐसी स्किन से संबंधित समस्‍या है जिसमें त्‍वचा की रंग बनाने वाली कोशिकाएं ज‍िसे मेलानोसाइट (Melanocyte) कहा जाता है खत्‍म होने लगती है। जिस वजह से त्‍वचा के उस ह‍िस्‍से पर सफेद दाग और धब्‍बे नजर आने लगते है। ये समस्‍या शरीर के किसी भी हिस्‍से पर नजर आ सकती है।

व‍िट‍िल‍िगो का इलाज करके इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है लेकिन इस समसया का पूरा इलाज नहीं है। यह समस्‍या जननांगों में भी नजर आ सकती है। जी हां, कई पुरुष पेन‍िस यानी ल‍िंग के आसपास नजर आने वाले इन सफेद दाग (व‍िट‍िल‍िगो) से परेशान होते है। आइए जानते है इस बारे में।

 पेनाइल व‍िटिल‍िगो के लक्षण

पेनाइल व‍िटिल‍िगो के लक्षण

ल‍िंग या पेन‍िस पर व‍िटिल‍िगो का मुख्‍य लक्षण पेनिस की त्‍वचा पर सफेद दाग उभरकर नजर आने होते है। लिंग का विटिलिगो आमतौर पर लिंग की ग्रंथियों या सिर के बजाय, चमड़ी और शाफ्ट पर दिखाई देता है। अगर आपके पेन‍िस के आसपास भी आपको ये लक्षण नजर आते है तो शरीर के दूसरे हिस्‍सों में भी आपने ये लक्षणों को महसूस जरुर किया होगा। इसके अलावा इन लक्षणों को भी देख सकते है

  • भूरे या सफेद बाल
  • बलगम झिल्ली के आसपास रंगहीनता होना, जैसे कि आपके मुंह और नाक की लाइनिंग
  • दृष्टि में बदलाव आना, आंखों की पुतल‍ियों के आसपास रंग कम होना।
  • पेनिस विट‍िल‍िगो के कारण

    पेनिस विट‍िल‍िगो के कारण

    सामान्‍यतौर पर ये समस्‍या किसी को तब होती है जब रंग बनाने वाली कोशिका मेलानोसाइट काम करना बंद कर देती है। हालांकि इस समस्‍या के पीछे सिर्फ ये ही एक वजह नहीं है। और कई ऐसे कारक जिसके वजह से ये स्किन कंडीशन उभरकर आने लगती है। माना जाता है कि नीचे बताए जा रहे है ये कारण मुख्‍य है।

    - स्‍ट्रेस

    - आनुवांशिकता

    - विशिष्ट रसायनों या फिनोल और कैटेचोल के संपर्क में आने की वजह से

    - सनबर्न

    - डिसफंक्‍शन और इम्‍यून सिस्‍टम भी वजह है।

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    ऊपर बताए गए कारणों के अलावा, कुछ रिसर्च से मालूम चलता है कि पेनाइल विटिलिगो एक ऑटोइम्‍यून कंडीशन है, यह स्थिति तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर में गलती से स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करना शुरु कर देती है।

    पेनाइल विटिल‍िगो का उपचार

    पेनाइल विटिल‍िगो का उपचार

    ये ऑटो इम्‍यून कंडीशन का पता मेडिकल चेकअप के जरिए ही मालूम चलता है। इस समस्‍या से न‍िजात पाने के ल‍िए विटिलाइगो एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए। ये भी डर्मटॉलजिस्ट या स्किन स्पेशलिस्ट ही होते हैं।

    डॉक्‍टरी जांच के दौरान डॉक्‍टर आपके लिंग के अलावा शरीर के बाकी हिस्‍सों की जांच करता है। ये इसल‍िए किया जाता है ताकि मालूम किया जाए कि कहीं आपके शरीर के दूसरे भागों पर भी विटिल‍िगो का असर तो नहीं हो रहा है।

    सफेद दाग के इलाज के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती हैं। सफेद दाग को रोकने वाली और स्किन कलर वापस लाने वाली। इनमें भी खानेवाली और लगानेवाली, दो अलग-अलग तरह की दवाएं दी जाती हैं।

    थैरेपी से ट्रीटमेंट

    थैरेपी से ट्रीटमेंट

    पेनाइल विटिल‍िगो से राहत पाने के ल‍िए फोटो थैरेपी ट्रीटमेंट का सहारा भी ल‍िया जाता है। इसके तहत सूरज की किरणों (UVA) और नैरोबैंड (UVB) का इस्तेमाल स्किन का रंग फिर से नॉर्मल करने के लिए किया जाता है। एक्जाइमर लेजर भी इस पेन‍िस की त्‍वचा का रंग ठीक किया जा सकता है।

    सर्जरी

    सर्जरी

    स्किन का कलर नॉर्मल करने के लिए स्किन ग्राफ्टिंग और सक्शन ब्लिस्टर एपिडर्मल ग्राफ्टिंग जैसी सर्जरी करके भी पेनाइल विटिल‍िगो जैसी स्किन कंडीशन को दूर किया जा सकता है। इनमें कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं हैं, लेकिन बीमारी के फैलने से रोकने के बाद ही इन्हें कराना सही रहता है।

    स्किन ग्राफ्टिंग के जरिए एक जगह की स्किन निकालकर दाग वाली जगह पर लगाकर पेनाइन विटिल‍िगो की समस्‍या से राहत पाया जा सकता है।

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    सक्शन ब्लिस्टर एपिडर्मल ग्राफ्टिंग से स्किन को वैक्यूम के जरिए दो भाग में अलग करके जहां सफेद दाग है, वहां ऊपरी भाग को रखा जाता है। ऊपरी भाग के जो रंग बनाने वाले कण हैं, वे सफेद दाग की जगह वाले स्किन के अंदर जाकर सामान्य रंग ले आते हैं।

    जटिलताएं

    जटिलताएं

    पेनाइल विटिलिगो घातक या खतरनाक नहीं है। इसकी वजह से आपका स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होता है। ये आपके यौन स्वास्थ्य में भी किसी प्रकार से जटिल नहीं बनाती है। पेनाइल विटिलिगो वाले पुरुषों में में त्वचा कैंसर, आंखों की समस्याएं और सुनने की समस्याएं विकसित होने का अधिक खतरा मंडराता है।

English summary

How to Manage Penile Vitiligo: symptoms, Causes and Diagnosis

A classification of vitiligo, penile vitiligo is the discolouration of the shaft and the foreskin of the penis. It develops before the age of 20 and is autoimmune in nature.
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