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आज से ही बदलें अपनी ये रोजर्मरा की आदतें, वरना बाद में पछताना पड़ेगा
रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई ऐसे काम करते है, जो हमारे शरीर को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकते है। इसलिए ये जरूरी है कि इन आदतों को बदलने का बीड़ा उठाया जाए। यहां हम आपको उन प्रमुख आदतों के बारे में बताने जा रहे है, जो हमारी बॉडी पर विपरित प्रभाव ड़ाल सकती है।

1: फ़्लिप-फ़्लॉप पहनना
जब आप फ्लिप-फ्लॉप वाले चप्पल या सेंडल पहनते है तो आपके पैर की उंगलियां अत्यधिक झुक जाती हैं और फंगल इंफेक्शन के संपर्क में आ जाती हैं। इसके अलावा, फ़्लिप-फ़्लॉप पहनने की वजह से पिंडली में मोच और मांसपेशियों में दर्द बढ़ सकता है। जिन्हें फ्लिप-फ्लॉप पेटर्न पसंद है उन्हें एड़ी, पीठ और घुटने के दर्द से भी गुजरना पड़ता है। इसलिए ये जरूरी है कि हर रोज फ़्लिप-फ़्लॉप पहनने से बचें।

2: टूथ ब्रश करने के बाद माउथवॉश का इस्तेमाल करना
बहुत से लोगों को टूथ ब्रश करने के बाद माउथवॉश इस्तेमाल करने की आदत होती है। लेकिन क्या आप ये बात जानते है कि आपकी ये आदत दांतों की सड़न का कारण बन सकती है। क्यूंकि जब आप माउथवॉश से अपने दांत क्लीन करते है, तो आप कम सांद्रता वाले फ्लोराइड के लिए उच्च सांद्रता वाले फ्लोराइड का इस्तेमाल करते हैं, जो कीटाणुओं को आकर्षित करता है। और आखिरकार, आपकी इस आदत की वजह से आपके दांत सड़ने लगते है।

3: स्किनी जींस पहनना
टाइट जींस ब्लड फ़्लो को कम करती है और इस कारण आपकी मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड जाती है। बल्कि स्किनी जींस पहनने से थ्रश जैसे फंगल इंफेक्शन भी हो सकते हैं। इसके अलावा, ये बार-बार यूरिन आने और ब्लेडर की कमजोरी का कारण बन जाता है।

4: घर पर प्रिंटिंग करना
लेज़र प्रिंटर और जो प्रिंटर टोनर का उपयोग आप घर पर करते हैं वे समग्र रूप से अत्यंत छोटे कण छोड़ते हैं जो आपके पास होने पर कार्डियोवस्कुलर या रेस्पिरेटरी डैमेज का कारण बन सकते हैं। चूहों पर की गई एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि टोनर कणों के 21 दिनों के संपर्क में आने से मेटाबॉलिज्म, इम्यून रेस्पोंस और अन्य बायोलॉजिकल प्रोसेस में गड़बड़ी हुई है।

5: बिस्तर पर सोते हुए पढ़ना
सोते-सोते पढ़ना किसी भी तरह से फायदा नहीं पहुंचा सकता है, बल्कि ये हर तरह से हानिकारक है। इससे आंखों पर प्रेशर पड़ता है। दरअसल पढ़ाई के लिए ये पॉजिशन ही सही नहीं है, क्यूंकि पढ़ने की दूरी 60 डिग्री के कोण के साथ लगभग 15 इंच होनी चाहिए। और जब आप लेटे हुए पढ़ते हैं, तो आपकी आंखों को ऊपर की ओर फोकस करना होता है और लंबे समय तक एक असहज एंगल बनाए रखना होता है। लेकिन ये पॉजिशन बेचैनी, धूंधलापन और सिरदर्द का कारण बन जाती है।

6: एयर फ्रेशनर का उपयोग करना
अधिकांश फ्रेशनर में हानिकारक केमिकल होते हैं जो गंध को बेअसर करते हैं। लेकिन इनमें संभावित एलर्जी और पर्यावरण को दूषित करने वाले टॉक्सिन भी होते हैं। कृत्रिम सुगंध के बार-बार उपयोग से फेफड़ों को नुकसान और अस्थमा हो सकता है। इसलिए उनसे दूर रहने की सलाह दी जाती है।

7: अपना चेहरा अपने हाथों पर टिकाए रखना
अपने चेहरे को अपने हाथ पर रखने से मुंहासे हो सकते हैं और कीटाणु फैल सकते हैं। क्यूंकि वो हर समय साफ नहीं रहते। दूसरा कारण - आपके बैठने की ये पॉजिशन गलत है। क्यूंकि सिर को सहारा देने से लंबे समय तक बैठना अधिक आरामदायक हो जाता है। इस कारण, आपकी स्पाइन गलत पोस्चर में ढ़ल जाती है।

8: नुकीले जूते पहनना
नुकीले जूते दिखने में तो बहुत अच्छे लगते है, लेकिन ये आपके पैरों को अंदर से खराब कर देते है। बल्कि ये नर्व में सूजन का कारण भी बन सकता है। जिससे निजात पाने के लिए थैरेपी, इंजेक्शन या फिर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।



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