Latest Updates
-
Putrada Ekadashi 2026: 23 या 24 अगस्त, कब है पुत्रदा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
कौन हैं क्रिकेटर मेधावी बिधूड़ी? ‘6-7’ सेलिब्रेशन के बाद इंटरनेट पर हुईं वायरल, खूबसूरती के दीवाने हुए फैंस -
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय -
53 की उम्र में दूल्हा बने अर्जुन रामपाल, गोवा में 14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला संग रचाई शादी -
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार
आंखों से भी शरीर में पहुंच सकता है कोरोनावायरस, आंसू से भी संक्रमण का खतरा
कोरोनावायरस आंसुओं के जरिए भी संक्रमण फैला सकता हैं। यह दावा अमेरिका की प्रतिष्ठित रिसर्च यूनिवर्सिटी जॉन्स हॉपकिन्स के शोधकर्ताओं ने किया है। उनका कहना है कि एसीई-2 नाम के एंजाइम रिसेप्टर की मदद से कोरोनवायरस शरीर की कोशिकाओं के जरिए आंखों में प्रवेश कर सकता है।
नई रिसर्च के नतीजों में सामने आया है कि फेफड़ों, श्वसन मार्ग और दूसरे अंगों की तरह आंखों में भी ACE-2 रिसेप्टर का निर्माण होता है। इनकी मदद से कोरोना का Sars-CoV-2 शरीर में पहुंच सकता है। अगर संक्रमित मरीज के खांसने या थूक की ड्रॉपलेट्स आंखों तक पहुंचते हैं तो भी कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है।

कंजेक्टिवाइटिस भी हो सकता है
रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 आंखों की प्रचलित बीमारी कंजेक्टिवाइटिस की वजह भी सकता है। 30% मरीजों में भी ऐसे लक्षण पाए गए हैं। जब आंखों में सूजन आती है और वे लाल हो जाती हैं। कोरोनावायरस श्वसन मार्ग से भी आंखों तक पहुंच सकता है और ऐसी स्थिति बीमारी को और भी गंभीर बना देती है।

हाईबीपी और डायबिटीज के मरीजों को खतरा अधिक
शोधकर्ताओं के मुताबिक, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में एसीई-2 रिसेप्टर स्वस्थ लोगों के मुकाबले अधिक पैदा होता है, इसलिए इन्हें संक्रमण का खतरा भी ज्यादा है। रिसर्च के दौरान ऐसे प्रमाण भी मिले हैं जो बताते हैं धूम्रपान करने वालों में भी यह ज्यादा बनता है।

जितना अधिक एसीई-2 रिसेप्टर, उतना खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना आंखों के जरिए शरीर में पहुंच सकता है इसलिए आंसुओं से संक्रमण फैल सकता है। एसीई-2 रिसेप्टर एक तरह से कोरोना का गेट-वे है जिसकी मदद से ये एंट्री करता है। एसीई-2 रिसेप्टर आंखों के कॉर्निया में पाया जाता है। रिसर्च टीम के प्रमुख शोधकर्ता लिन्गली झाउ के मुताबिक, शरीर में यह रिसेप्टर जितनी ज्यादा मात्रा में बनेगा संक्रमण का खतरा उतना ही ज्यादा होगा और वायरस आसानी से रक्त तक पहुंच जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications