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कृष्ण कमल का फूल: दुनिया के खूबसूरत फूलों में से एक है ये फूल, इन बीमारियों का करता है नाश
फूल किसी भी घर की खूबसूरती में चार-चांद लगा देते हैं। जहां कुछ फूल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं तो कुछ फूलों की मेडिकल प्रॉपर्टीज व्यक्ति को लाभ पहुंचाती हैं। हालांकि, कृष्ण कमल एक ऐसा फूल है, जो ना केवल दुनिया के सबसे खूबसूरत फूलों में से एक है, बल्कि इसकी मेडिकल प्रॉपर्टीज भी कम नहीं है। कृष्ण कमल के फूल को पैशन फ्लावर के नाम से भी जाना जाता है और इसका संबंध महाभारत से भी माना गया है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कृष्ण कमल के फूल की मेडिकल प्रॉपर्टीज और उससे मिलने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं-

महाभारत से है संबंधित
ऐसा माना जाता है कि इस फूल का संबंध महाभारत से है-
• इसमें लगभग 100 नीली पंखुड़ियां हैं, जो कौरवों को संदर्भित करती हैं
• बीच में पांच पीली पंखुड़ियां पांडवों को इंगित करती हैं।
• केंद्र में ग्रीन बल्ब पांडवों की रानी द्रौपदी का प्रतीक है।
• फूल के ऊपर मौजूद तीन कलियों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक माना जाता है।
• केंद्र में कृष्ण का सुदर्शन चक्र है।
पैशनफ्लावर सफेद, नीले, बैंगनी जैसे कई रंगों में खिलता है। कृष्ण कमल के फूल (पैशनफ्लॉवर) के खिलने की अवधि मई से जुलाई तक होती है, हालांकि, इसे फूल पौधे पर पूरे वर्ष रहते हैं।

कृष्ण कमल के फूल के औषधीय गुण
इस प्लांट को शुरू में अमेरिकियों द्वारा उपयोग किया गया था, और फिर यह यूरोप पहुंच गया। अब, यह प्लांट भारत, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि में इस्तेमाल किया जाता है।
इस पौधे में सक्रिय घटक जैसे एल्कलॉइड, फ्लेवोनोइड्स और अन्य संबंधित कंपाउंड पाए जाते हैं और इसलिए औषधीय प्रयोजनों के लिए पूरे पौधे का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। कुछ लोग इसे सुखाकर इस्तेमाल करना भी पसंद करते हैं। इस हर्ब को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स को मैनेज के लिए प्रभावी माना जाता है और यह अन्य स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है।

कृष्ण कमल के फूल के स्वास्थ्य लाभ
शोध के अनुसार कृष्ण कमल के फूल या पैशनफ्लॉवर से कई तरह के लाभ मिल सकते हैं-
• एडिक्शन को रोकने या उसका इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।
• कोकीन, हेरोइन, या अफीम को छोड़ने के बाद शरीर में होने वाले केमिकल रिएक्शन को रोकने में मददगार है, जिससे व्यक्ति को मतली या उल्टी जैसा अहसास होता है।
• अस्थमा अटैक के इलाज में मदद करता है
• मिर्गी के दौरे की गंभीरता को कम करने में मददगार है।
• अवसाद को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
• मधुमेह पीड़ित व्यक्ति में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करें।
• मरीज को आराम देने के लिए ऑपरेशन प्रक्रिया से 30 मिनट पहले दिया जाता है
• पैशनफ्लावर की चाय सिरदर्द, माइग्रेन आदि के लिए बहुत कारगर है।
• इसे खाने में बतौर फ्लेवरिंग इंग्रीडिएंट के रूप में उपयोग किया जाता है
• सूजन को कम करता है
• रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के लिए फायदेमंद है।
• इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के इलाज में मदद करता है।
• आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है।
कितनी मात्रा में लें यह हर्ब?
यह बाजार में विभिन्न खुराक रूपों में उपलब्ध है जैसे कि लिक्विड एक्सट्रैक्ट, गोलियां (सूखे अर्क की 425 मिलीग्राम), चाय (सूखे मोटे पाउडर), और टिंचर आदि। चिंता, मानसिक तनाव, बेचैनी, थकान या चिड़चिड़ापन आदि के लिए आपको सही मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए।
• अनुशंसित पारंपरिक खुराक प्रतिदिन 4-6 ग्राम हर्ब है।
• तनाव, हल्की चिंता से जुड़े लक्षणों के लिए आप प्रतिदिन एक टैबलेट (425 मिलीग्राम सूखे अर्क) का सेवन कर सकते हैं। गोलियों को पानी के साथ पूरा निगल लें और उन्हें चबाएं नहीं।
• पैशनफ्लॉवर चाय या टिंचर अनिद्रा, मानसिक चिंता आदि को कम करने में सहायक है।
• तनाव, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और तंत्रिका तनाव को कम करने के लिए 0.5-2 ग्राम सूखे पौधे का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसका सेवन दिन में तीन बार करना चाहिए। जड़ी बूटी के 2 ग्राम को रोजाना तीन से चार बार इन्फ्यूज़न के रूप में लिया जा सकता है।
• पैशनफ्लावर का काढ़ा अस्थमा के खिलाफ बहुत कारगर होता है।



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