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विजया एकादशी पर बाल-नाखून कटवा सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहता है शास्त्र और क्या होगा परिणाम
Vijaya Ekadashi 2026 Hair & Nail Cut Niyam: आज विजया एकादशी है जिसका हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि माना गया है। विशेषकर विजया एकादशी, जो जातक को कठिन परिस्थितियों में विजय दिलाती है, जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है। ऐसे में इसके नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। अक्सर श्रद्धालु इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि क्या एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी या नाखून काटे जा सकते हैं?
ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई एक छोटी सी भूल आपके व्रत के पुण्य फल को नष्ट कर सकती है। आइए जानते हैं कि विजया एकादशी के दिन बाल-नाखून और दाढ़ी कटवा सकते हैं या नहीं और इसके पीछे के धार्मिक कारण और ज्योतिषीय महत्व भी जान लेते हैं।

क्या विजया एकादशी पर नाखून-बाल कटवा सकते हैं या नहीं
हिंदू धर्मग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के पावन दिन पर 'क्षौर कर्म' यानी बाल और नाखून काटना करना वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बाल-नाखून या दाढ़ी कटवाने से विष्णु भगवान नाराज हो जाते हैं। जो जातक व्रत रख रहे हैं उनके और उनके परिवार के लिए भी ये निमय लागू होता है और जिन लोगों के घर में एकादशी का व्रत नहीं रखते उन्हें भी इस नियम का पालन करना चाहिए।
क्या कहता है शास्त्र?
धर्मशास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि 'हरि वासर' होती है। इस दिन शरीर की शुद्धि और सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य है। शास्त्रों में उल्लेख है कि एकादशी के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इसे 'क्षौर कर्म' की श्रेणी में रखा गया है, जो इस पवित्र तिथि पर वर्जित है। यदि कोई व्यक्ति व्रत नहीं भी रख रहा है, तो भी उसे एकादशी के दिन इन कार्यों से परहेज करना चाहिए।
विजया एकादशी पर बाल-नाखून काटने के परिणाम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर बाल या नाखून काटने से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं जो नीचे बताए गए हैं-
पुण्य का क्षय: माना जाता है कि ऐसा करने से पूरे दिन की गई पूजा और व्रत का फल निष्फल हो जाता है।
ग्रह दोष: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी पर बाल काटने से ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो सकती है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
दरिद्रता का आगमन: पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पवित्र तिथियों पर नाखून काटना घर में आर्थिक तंगी या दरिद्रता का कारण बन सकता है।
आखिर एकादशी पर पाबंदी क्यों है?
एकादशी का दिन मानसिक एकाग्रता और भक्ति का होता है। बाल या नाखून काटना तामसिक प्रवृत्तियों और हिंसा से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन सात्विकता बनाए रखने के लिए शरीर के किसी भी अंग के कर्तन (काटने) की मनाही होती है। साथ ही, एकादशी पर चंद्रमा की स्थिति का हमारे मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है, और शास्त्रों के अनुसार इस दिन शरीर के रोम कूपों को क्षति पहुंचाना नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करना है।
अगर गलती से बाल-नाखून कट जाएं तो क्या करें?
यदि आपने अनजाने में विजया एकादशी के दिन बाल या नाखून काट लिए हैं, तो घबराएं नहीं। इसके प्रायश्चित के लिए आप नीचे दिए गए उपाय कर सकते हैं
भगवान विष्णु से अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।
अगले दिन (द्वादशी) किसी जरूरतमंद को अन्न या पीले वस्त्र का दान करें।
विजया एकादशी पर अन्य वर्जित कार्य
चावल का सेवन: एकादशी पर चावल खाना पूरी तरह वर्जित है।
तुलसी दल न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, पूजा के लिए एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
क्रोध और निंदा: इस दिन किसी की बुराई न करें और न ही झूठ बोलें।



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