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Janmashtami Vrat in Periods: पीरियड्स में जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहते हैं नियम
Janmashtami Vrat in Periods: 16 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी है। ये दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी, पर भक्त विशेष पूजा-अर्चना और व्रत रखते हैं। महिलाएं भी पूरे श्रद्धा भाव से उपवास और भजन-कीर्तन में भाग लेती हैं। लेकिन जब जन्माष्टमी के पावन दिन पर किसी महिला को मासिक धर्म आ जाए तो वो असमंजस में आ जाती है कि अब वो व्रत रखें या नहीं।
हिंदू धर्म में मासिक धर्म को लेकर सदियों से अलग-अलग मान्यताएं चली आ रही हैं। जन्माष्टमी को कुछ ही घंटे बाकी हैं और इससे पहले जान लेते हैं कि अगर जन्माष्टमी वाले दिन पीरियड्स आ जाए तो क्या करें।

पीरियड्स में जन्माष्टमी व्रत रखें या नहीं?
हर महिला के लिए उस समय परेशानी खड़ी हो जाती है जब किसी खास व्रत के दिन उन्हें पीरियड्स आ जाएं। ऐसे में समझ नहीं आता कि व्रत रखें या नहीं। अब जन्माष्टमी करीब है तो उन महिलाओं की चिंता बढ़ गई है जो कृष्ण भक्त हैं लेकिन पीरियड्स की वजह से वो व्रत रखें या नहीं इस सोच में पड़ गई हैं। ऐसा नहीं है कि पीरियड्स के दौरान जन्माष्टमी व्रत नहीं रखा जाता। आप रख सकती हैं लेकिन कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
पीरियड्स में जन्माष्टमी व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप पीरियड्स में जन्माष्टमी व्रत रखने का मन बना चुकी हैं तो इसमें कोई दिक्कत की बात नहीं है। मगर हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान मंदिर प्रवेश, पूजा-पाठ और व्रत को वर्जित माना गया है। ऐसे में आप अगर व्रत रखती हैं तो भगवान को स्पर्श करने से बचें। मंदिर में न जाएं और दूर से ही उनके दर्शन कर लें। सुबह उठकर स्नान करें और मन ही मन व्रत का संकल्प लें।
पीरियड्स में कैसे करें लड्डू गोपाल की सेवा
माना जाता है कि अगर किसी के घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं तो उनकी सेवा जरूर करनी चाहिए। महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि पीरियड्स के दौरान उनकी सेवा कैसे की जाए। अनिरुद्धाचार्ज महाराज के अनुसार, पीरियड्स में महिलाओं को लड्डू गोपाल को छूना नहीं चाहिए और न ही उन्हें ऐसी महिला के हाथ से बना भोग भी नहीं लगाना चाहिए।
व्रत में पीरियड्स आने पर क्या करें
मन से भगवान का स्मरण और भजन करें।
हल्के आहार के साथ व्रत रखें।
घर में शांत माहौल में पूजा करें।
व्रत में पीरियड्स आने पर क्या न करें
अति कठोर व्रत या लंबा निर्जल उपवास।
खुद को थकावट की स्थिति में ले जाना।
स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना।



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