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Jitiya Vrat Me Pani Kab Piye: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहता है नियम
Jitiya Vrat Me Pani Kab Piye: जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे संक्षेप में जितिया व्रत भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य, और कल्याण के लिए करती हैं। यह व्रत बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में विशेष रूप से प्रचलित है।
यह व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। व्रत तीन दिनों तक चलता है और इसे बहुत ही कठोर व्रत माना जाता है। पहले दिन 'नहाय-खाय' की परंपरा के तहत महिलाएं पवित्र स्नान करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, जिसमें व्रती महिलाएं बिना भोजन और जल के उपवास करती हैं। तीसरे दिन पारण करके व्रत का समापन होता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, इस व्रत का संबंध राजा जिमूतवाहन से है, जिन्होंने नागों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। उनकी इस निःस्वार्थ भक्ति और त्याग की स्मृति में माताएं यह व्रत करती हैं। यह व्रत संतान की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के असीम त्याग और संतान के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक है। पहली बार जितिया व्रत कर रही माताओं को इस पर्व के नियमों को लेकर मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। जैसे क्या इस व्रत में पानी पिया जा सकता है या नहीं? आइये इसका जवाब जानते हैं:
जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? (Jitiya Vrat Me Pani Pi Sakte Hain Ya Nahi?)
जितिया व्रत में न तो अन्न का एक दाना और न ही पानी की एक बूंद ग्रहण की जाती है। जितिया व्रत निर्जला रखा जाता है। इस व्रत को करने वाली महिलाएं पूरे दिन पानी ग्रहण नहीं करती हैं। जितिया व्रत के दौरान पानी पीना सख्त मना है। इस व्रत को करने वाली महिलाओं को पूरे व्रत के दौरान पानी पीने से बचना चाहिए। करवा चौथ व्रत, हरतालिका तीज व्रत की भांति जितिया व्रत के दौरान भी पानी पीने की मनाही होती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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