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चैत्र नवरात्रि 2019: जान लें घट स्थापना का मुहूर्त और सही विधि
माता के भक्तों का पर्व 6 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस साल चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल, शनिवार से शुरू होगी और इसका समापन 14 अप्रैल को राम नवमी के साथ होगा। इस नवरात्रि में कई शुभ संयोग बन रहे हैं जिससे भक्तों को उनकी सेवा का अच्छा लाभ मिलेगा और उनकी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होंगी।
इन नौ दिनों तक माता के अलग अलग स्वरूप की आराधना की जाएगी। इस बार नवमी में रवि पुष्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। यूं तो नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है लेकिन दोनों ही नवरात्रि का अपना अलग महत्व होता है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं इस साल चैत्र नवरात्रि में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि।

घट स्थापना अथवा कलश स्थापना का शुभ समय
चैत्रमास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के पहले दिन घटस्थापना के साथ माता की आराधना शुरू की जाती है। 6 अप्रैल को सुबह 6:09 से 10:19 बजे तक कलश स्थापना का मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त 11:46 बजे से 12:36 बजे तक रहेगा।

इस विधि से करें कलश स्थापना
इसके लिए सबसे पहले जौ बोने के लिए एक पात्र ले लें। वो बर्तन ऐसा हो जिसमें कलश रखने के बाद भी उसमें जगह हो। ये पात्र अगर मिट्टी से बना हो तो बेहतर होगा। अब इसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी की परत फैला दें। ध्यान रहे की मिट्टी साफ़ और शुद्ध हो। इस बर्तन के बीच में कलश के लिए स्थान छोड़ कर बाकि स्थान पर जौ के बीज डाल दें। अब उसके ऊपर मिटटी की एक और परत डाल दे और फिर उसके ऊपर जौ डाल कर मिटटी की एक परत और बिछा दें। अब इसमें जल का छिड़काव कर दें।

ऐसे सजाएं कलश
अब इस मिट्टी के बर्तन में रखने के लिए कलश तैयार करें। कलश में स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और इसके गर्दन पर मौली बांधें। कलश में गंगाजल और शुद्ध जल मिलाकर भर दें। कलश में साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा रखें। इसमें इत्र, पंचरत्न और सिक्का डाल कर, पांच तरह के पत्ते डालें। पत्ते ऐसे रखें की उनका कुछ हिस्सा कलश से बाहर दिखाई दे। अब इसपर ढक्कन लगा दें।

कलश के ऊपर रखें नारियल
इस ढक्कन को साबुत चावल से भरें। इसपर नारियल भी रखा जाता है। नारियल लेकर उसे लाल कपड़े में लपेटें और फिर मौली से बांध दें। इसे अब कलश के ऊपर रखें। याद रखें की नारियल का मुंह आपकी तरफ हो। यदि ये ऊपर की तरफ हुआ तो इससे रोग बढ़ते हैं और नीचे की तरफ रहने से शत्रु बढ़ते हैं। पूर्व में होने से धन संपत्ति में गिरावट होने लगती है। अब इस कलश को जौ उगाने के लिए जो पात्र तैयार किया था उसके मध्य में रख दें।

माता से मांगे आशीर्वाद
अब सभी देवी देवताओं से प्रार्थना करें कि वो सभी नौ दिनों तक कलश में विराजमान रहें। कलश की पूजा करके उसे टीका करें, अक्षत, फूल, इत्र तथा फल मिठाई आदि चढ़ाएं। घट स्थापना के बाद मां की चौकी स्थापित करने का काम करें।



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