Latest Updates
-
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व
तुलसी की पत्तियों के साथ ना करें ये काम, नहीं तो हो जाएंगी नाराज़
तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से तुलसी एक औषधि है। तुलसी को हजारों वर्षों से विभिन्न रोगों के इलाज के लिए औषधि के रूप में प्रयोग किया जा रहा हैं।
आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय प्रयोगों का विशेष स्थान हैं। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना जाता है। यही नहीं इसके साथ एक प्रसिद्ध कहावत भी है कि "जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वह पूजनीय स्थान होता है और वहां कोई बीमारी या मृत्यु के देवता नहीं आ सकते हैं।
READ: भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाई जाती है तुलसी
तुलसी का पौधा घरों में और मंदिरों में लगाया जाता है, साथ इसकी पत्तियां भगवान विष्णु को अर्पित की जाती हैं। इसके औषधिय गुणों के अलावा यह कभी-कभी हमारे शरीर को नुक्सान भी पंहुचा सकती है।

तुलसी के पत्ते नहीं चबाने चाहिये
तुलसी के पत्तों का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन पत्तों को चबाए नहीं बल्कि निगल लेना चाहिए। इस प्रकार तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ प्राप्त होता है। तुलसी के पत्तों में पारा धातु के तत्व होते हैं जो कि पत्तों को चबाने से दांतों पर लग जाते हैं। ये तत्व दांतों के लिए फायदेमंद नहीं है।

शिवलिंग पर तुलसी की पत्ती नहीं चढ़ाई जाती हैं
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जालंधर नाम का एक असुर था जिसे अपनी पत्नी की पवित्रता और विष्णु जी के कवच की वजह से अमर होने का वरदान मिला हुआ था। जिसका फ़ायदा उठा कर वह दुनिया भर में आतंक मचा रहता। जिसके चलते भगवान विष्णु और भगवान शिव ने उसे मरने की योजना बनायीं। पहले भगवान विष्णु से जालंधर से अपना कृष्णा कवच माँगा, फिर भगवान विष्णु ने उसकी पत्नी की पवित्रता भांग की जिससे भगवान शिव को जालंधर को मरने का मौका मिल गया। जब वृंदा को अपने पति जालंधर की मृत्यु का पता चला तो उसे बहुत दुःख हुआ। जिसके चलते गुस्से में उसने भगवान शिव को शाप दिया कि उन पर तुलसी की पट्टी कभी नहीं चढ़ाई जाएंगी। यही कारण है कि शिव जी की किसी भी पूजा में तुलसी की पत्ती नहीं चढ़ाई जाती है।

इन दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए तुलसी के पत्ते
शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोड़ने चाहिए। ये दिन हैं एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण काल। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। बिना उपयोग तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति को दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ना, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है।

मौत का शाप
बे वजह तुलसी के पत्ते तोड़ने से मृत्यु का शाप लगता है।

तुलसी का अपमान नहीं करना चाहिए
जिस घर में तुलसी लगी हो वहां उसकी रोज़ पूजा करनी चाहिए। क्योंकि यह मन जाता है कि इसे पूजने वाला व्यक्ति स्वर्ग में जाता है।

गणेश पूजन में वर्जित है तुलसी के पत्ते
एक कथा के अनुसार एक बार तुलसी जंगल में अकेली घूम रही थी जब उन्होंने गणेश जी को देखा जो की ध्यान में बैठे थे। तब तुलसी ने गणेश जी सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और उन्होंने यह कह कर अस्वीकार कर दिया की वो ब्रह्मचारी है जिससे रुष्ट होकर तुलसी ने उन्हें दो विवाह का श्राप दे दिया, प्रतिक्रिया स्वरुप गणेश जी ने तुलसी को एक राक्षस से विवाह का श्राप दे दिया। इसलिए गणेश पूजन में भी तुलसी का प्रयोग वर्जित है।

तुलसी ने माफ़ी मांगी
श्राप मिलने के बाद तुलसी को अपनी गलती का एहसास होता है और वह गणेश जी से माफ़ी मांगती है। इससे खुश हो कर गणेश जी अपना दिया हुआ शाप कम कर देते हैं। और कहते हैं कि सिर्फ भगवान ही उसे एक पवित्र पौधे का दर्जा दे सकते हैं तब वह इस शाप से मुक्त हो जायेगी। लेकिन गणेश जी पर उसकी पत्ती नहीं चढ़ाई जायेगी।

तुलसी के पौधे को घर के अंदर नहीं लगाया जाता
ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के पति के मृत्यु के बाद भगवान विष्णु ने तुलसी को अपनी प्रिये सखी राधा की तरह माना था। इसलिए तुलसी ने उनसे कहा कि वे उनके घर जाना चाहती हैं। लेकिन भगवान विष्णु ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि मेरा घर लक्ष्मी के लिए है लेकिन मेरा दिल तम्हारे लिए है।

तुलसी का पौधा घर के बाहर ही लगाएं
तब तुलसी ने कहा कि घर के अंदर ना सही बाहर तो उन्हें स्थान मिल सकता है, जिसे भगवान विष्णु ने मान लिया। तब से आज तक तुलसी का पौधा घर और मंदिरों के बाहर लगाया जाता है।



Click it and Unblock the Notifications