योग के दौरान मंत्रों के उच्चारण से होता है ये फायदा

Posted By: Rupa Singh
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योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा तीनों को एक साथ लाने का काम होता है। योग हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और इस बात का उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। योग दो प्रकार के होते हैं हठ योग और राज योग। जहां हठ योग शारीरिक विकास को और भी बेहतर बनाता है वहीं राज योग को अध्यात्म से जोड़ा जाता है। महान स्वामी विवेकांनद हठ योग का अभ्यास करने के लिए जाने जाते थे। स्वयं के बारे में ज्ञान आध्यात्मिकता का एक हिस्सा है।

योग साधना करने से मनुष्य का मन मस्तिष्क संतुलित रहता है। सही तरीके से ध्यान लगाने से आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति में भी वृद्धि होती है। कई बार लाख कोशिशों के बाद ध्यान लगाने में दिक्कतें आती है और मन विचारों की दुनिया में भटकने लगता है। ऐसे में आपकी सहायता करते हैं इन मन्त्रों का जाप। भले ही यह बहुत आसान मन्त्र है किन्तु इनका बहुत ही गहरा अर्थ होता है। आज हम आपको कुछ शक्तिशाली मन्त्रों के बारे में बताएंगे जिनका उच्चारण आप अपने योग अभ्यास के दौरान करके मानसिक शान्ति का अनुभव करेंगे। साथ ही यह मंत्र आपको सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करेंगे।

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''ॐ’’

कहते हैं जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी तो सबसे पहले चारों ओर यही ध्वनि गूँज रही थी। यह मंत्र आपकी अंतरात्मा को जगाता है। स्वयं को गहराई से जानने में आपकी मदद करता है।

ओम शांति शांति शांति

इस मंत्र का उच्चारण योग और ध्यान की समाप्ति के बाद किया जाता है। जब आप अपना योग समाप्त कर लेते हैं तो अपने दोनों हाथों को जोड़ कर इस मंत्र का उच्चारण तीन बार करें। इससे आपके शरीर के साथ साथ आत्मा को भी शांति मिलेगी।

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुव स्वः।

तत् सवितुर्वरेण्यं।

भर्गो देवस्य धीमहि।

धियो यो नः प्रचोदयात्॥

इस मंत्र का अर्थ है - हे प्रभु, कृपा करके हमारी बुद्धि को रौशनी प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये। इस मंत्र का जाप सूर्यदेव से प्रार्थना के लिए भी किया जाता है।

इस मंत्र का जाप केवल सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य में ही किया जाता है। इस मंत्र का जाप योग और ध्यान को प्रारम्भ करने से पहले किया जाता है।

वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

इस मंत्र का जाप गणेश जी का आह्वान करने के लिए किया जाता है। इसका अर्थ है “हे गणेश जी! आप महाकाय हैं। आपकी सूंड वक्र है। आपके शरीर से करोडों सूर्यों का तेज निकलता है। आपसे प्रार्थना है कि आप मेरे सारे कार्य निर्विध्न पूरे करें”।

योगेन चित्तस्य पदेन वाचां, मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।

योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां, पतंजलि प्रांजलिरानतोऽस्मि।।

इस मंत्र का अर्थ है चित्त-शुद्धि के लिए योग (योगसूत्र), वाणी-शुद्धि के लिए व्याकरण (महाभाष्य) और शरीर-शुद्धि के लिए वैद्यकशास्त्र (चरकसंहिता) देनेवाले मुनिश्रेष्ठ पातंजलि को प्रणाम !)

इस मंत्र के जाप से हम उन ऋषि मुनियों के आगे नतमस्तक होते हैं जिन्होंने हमें कई तरह के शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने में हमारे मदद की है जिससे हमारी आत्मा की भी शुद्धि हुई है।

स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्ताम्।

न्यायेन मार्गेण महीं महीशाम्।

गो ब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं।

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥

इस मंत्र के द्वारा हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि वो सबको खुशियां प्रदान करे। इस मंत्र का जाप हम ध्यान के दौरान किसी भी वक़्त कर सकते हैं।

ॐ सह नाववतु।

सह नौ भुनक्तु।

सह वीर्यं करवावहै।

तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

इसका अर्थ है - ॐ हम सभी सुरक्षित रहे, हम सब पोषित रहे, हम सब मिलकर पूरी ऊर्जा के साथ काम करें, हमारी बुद्धि और तेज़ हो, हम सब बुद्धिमान मनुष्य बने हमारे बीच किसी प्रकार का बैर न हो। शांति शांति शांति।

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।

यह मंत्र बृहदारण्यक उपनिषद में से है जो की सबसे प्राचीन उपनिषदों में से एक है। इसका अर्थ है हम असत्य से सत्य की ओर जाएं, अंधकार से प्रकाश की ओर जाएं, मृत्यु से अमरता की ओर जाएं।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥

ॐ वह (परब्रह्म) पूर्ण है और यह (कार्यब्रह्म) भी पूर्ण है, क्योंकि पूर्ण से पूर्ण की ही उत्पत्ति होती है। तथा (प्रलयकाल मे) पूर्ण (कार्यब्रह्म)- का पूर्णत्व लेकर (अपने मे लीन करके) पूर्ण (परब्रह्म) ही बचा रहता है।

यहां 'पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते' का अर्थ है कि अनन्त से अनन्त घटाने पर भी अनन्त ही शेष रहता है।

ओंग नमो गुरु देव नमो

इस मन्त्र से हम अपने गुरु का अभिवादन करते हैं। इसका अर्थ है हम उसके सामने नतमस्तक हो रहे हैं जो सब कुछ है जो दिव्य ज्ञानी है।

रा म द स सा से सो हंग

इस मंत्र का जाप कुण्डलिनी जागृत योग के दौरान किया जाता है। इसे ध्यान के दौरान खुद के लिए और दूसरों के लिए उपचार मंत्र की तरह प्रयोग किया जाता है।

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    English summary

    Don't Forget To Include These Mantras In Your Daily Yoga Practice

    These mantras will make your yoga practice more fruitful, they have been taken from the various books on yoga and meditation. To get complete benefits of the yoga, the mantras play a very significant role. Dont forget to include these mantras in your daily yoga.
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