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क्यों पूजनीय है पीपल का वृक्ष?

हमारे हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है। स्कंदपुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि इस वृक्ष में स्वयं देवी देवताओं का वास होता है। पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत: मूर्तिमान स्वरूप है। इसके आलावा भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ। इसलिए लोग इस वृक्ष की सेवा और पूजा पाठ करते हैं। ऐसा मानना है कि इस वृक्ष की पूजा करने से सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही मनुष्य निरोगी रहता है और इस वृक्ष को लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनष्ट नहीं होती।
लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पीपल के पेड़ को केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिष, आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। आइए जानते है इस वृक्ष से जुड़ी कुछ रोचक बातें।

दरिद्रता का निवास स्थल है पीपल
एक कथा के अनुसार जब देवताओं ने असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन किया था तब उसमें से लक्ष्मी जी से पहले उनकी बड़ी बहन दरिद्रता निकली थी। जब लक्ष्मी जी आईं तो उन्होंने विष्णु जी को अपने पति के रूप में चुन लिया। यह देख दरिद्रता नाराज़ हो गयी थीं। तब विष्णु जी ने उनसे कहा कि तुम मेरे प्रिय वृक्ष पीपल पर निवास करो और मेरी पूजा अर्चना करो। कहते हैं विष्णु जी दरिद्रता से मिलने पीपल के पेड़ पर आते हैं और साथ ही प्रत्येक शनिवार को उनके साथ देवी लक्ष्मी भी अपनी बड़ी बहन से मिलने आती हैं। इसलिए शनिवार के दिन इस वृक्ष की पूजा और परिक्रमा को बहुत ही शुभ माना गया है।
रोगों को दूर करने में सक्षम है पीपल
1. ज़हर का असर कम करता है पीपल: कहते हैं अगर किसी ज़हरीले जीव जंतु के कांटने पर व्यक्ति को थोड़ी थोड़ी देर में पीपल के पत्तों का रस पिलाया जाए तो इससे जहर का असर धीरे धीरे कम होने लगता है।
2. पीलिया में भी फायदेमंद: यदि पीपल के 3-4 पत्तों का रस मिश्री के साथ दिन में दो बार पीलिया से पीड़ित मरीज़ को 4 से 5 दिन तक पिलाया जाए तो ज़रूर फायदा होता है।
3. तनाव मुक्त रखता है पीपल: कहते हैं पीपल के पत्तों में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होता है इसलिए इसे रोज़ाना चबाने से तनाव दूर भागता है और व्यक्ति तरोताज़ा और ऊर्जावान महसूस करता है।
4. सांस से जुड़ी बीमारी में लाभदायक: अगर आपको सांस से जुडी तकलीफ है तो आप पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें और उसका चूर्ण बनाकर खाएं। इसके आलावा पीपल के पत्तों का दूध उबाल कर पीने से भी दमे से पीड़ित रोगी को फायदा होता है।
5. सुंदर त्वचा के लिए पीपल: पीपल की छाल का लेप या फिर इसके पत्तों का प्रयोग करके आप अपनी त्वचा को कोमल और सुन्दर बना सकते हैं। इसके अलावा ये झुर्रियों को भी कम करने में भी मदद करता है।
पीपल का ज्योतिषीय महत्व
पीपल एक ऐसा चमत्कारी वृक्ष है जिसकी सहायता से आप अपने जीवन की कई मुश्किलों का हल कर सकते हैं।
1. अगर आपकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति अशुभ है तो रोज़ाना (रविवार छोड़कर) पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करने से आपको फायदा मिलेगा।
2. अगर आप शनि की साढ़े साती और ढैया के प्रभाव को कम करना चाहते हैं तो हर शनिवार पीपल के पेड़ में गुड़ में दूध डाल का अर्पित करें, साथ ही वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
3. हर रोज़ शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं इससे भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा शनिवार के दिन पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करने से भी लाभ मिलता है।
4. पीपल की सेवा करने से आपकी कुंडली में से पितृदोष समाप्त हो जाएगा।
5. पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से आपकी कुंडली में से कालसर्प दोष भी समाप्त हो जाएगा।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पीपल के फायदे
पीपल को प्राणवायु यानी ऑक्सीजन को शुद्ध करने वाला पेड़ माना जाता है। कहते हैं पीपल चौबीस घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करता रहता है, जबकि अन्य वृक्ष रात में कार्बन डाईऑक्साइड या फिर नाइट्रोजन गैस छोड़ते हैं। इसके अलावा पीपल पर्यावरण को शुद्ध करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।



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