EId Chand Raat 2026 Saudi Arabia Live: कब दिखेगा ईद का चांद, जानें कब मनाई जाएगी ईद

EId Chand Raat 2026 Saudi Arabia Live: सऊदी अरब में चांद के दीदार के साथ ही दुनिया भर के मुसलमानों के दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं, क्योंकि यही वह पल है जो रमजान के मुकद्दस महीने की विदाई और खुशियों वाली ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr 2026) के आगमन का एलान करता है। सऊदी अरब के मक्का और मदीना के आसमान पर जैसे ही शव्वाल का बारीक चांद नजर आता है, पूरी दुनिया में ईद की मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो जाता है। अब लोगों का सवाल है कि क्या आज 'चांद रात' है?

वह रात जिसे इस्लाम में 'लैलातुल जायजा' यानी 'इनाम की रात' कहा गया है। सऊदी अरब के मक्का और मदीना के आसमान पर जैसे ही शव्वाल का बारीक चांद नजर आता है, पूरी दुनिया में ईद की मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो जाता है। साल 2026 में सऊदी अरब की 'मून साइटिंग कमेटी' (Moon Sighting Committee) के लाइव अपडेट्स पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। क्या आज सऊदी में ईद का चांद नजर आएगा? क्या कल वहां ईद की नमाज अदा की जाएगी? आज हम आपको आर्टिकल में बताएंगे कि आखिर इस्लाम में 'चांद रात' को इतनी अहमियत क्यों दी गई है और क्यों इसे इबादत की रात माना जाता है।

क्या सऊदी अरब में आज दिखेगा ईद का चांद?

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी आंखों से या दूरबीन के जरिए शव्वाल का चांद तलाशें। यदि आज चांद नजर आता है, तो सऊदी में कल यानी 19 मार्च 2026 को ईद मनाई जाएगी, जिसके आधार पर भारत और अन्य एशियाई देशों में शुक्रवार को ईद होने की संभावना प्रबल हो जाएगी। अब सभी की निगाहें सऊदी अरब में होने वाले चांद के दीदार पर टिकी हुई है।

इस्लाम में 'चांद रात' का रूहानी महत्व

इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी) के अनुसार, चांद रात केवल अगले दिन की तैयारी या खरीदारी का वक्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक मायने छिपे हैं जो नीचे बताए गए हैं।

1. लैलातुल जायजा (The Night of Reward)

हदीस के मुताबिक, रमजान के पूरे महीने रोजा रखने, तरावीह पढ़ने और इबादत करने वालों को 'चांद रात' के दिन अल्लाह की तरफ से इनाम दिया जाता है। जैसे एक मजदूर को काम खत्म करने पर मजदूरी मिलती है, वैसे ही मोमिनों को इस रात मगफिरत (माफी) का तोहफा मिलता है।

2. दुआओं की कुबूलियत की रात

मान्यता है कि साल में पांच रातें ऐसी होती हैं जिनमें मांगी गई दुआ कभी रद्द नहीं होती, उनमें से एक 'ईद की रात' (चांद रात) है। विद्वान बताते हैं कि इस रात को जागकर अल्लाह का जिक्र करना दिल को जिंदा रखने के समान है।

3. शव्वाल के चांद का दीदार

नया चांद देखना और उसके बाद की दुआ पढ़ना सुन्नत-ए-रसूल है। चाँद देखकर पढ़ी जाने वाली दुआ "अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-अम्नी वल-ईमान..."-हमें आने वाले महीने में अमन और सलामती की उम्मीद देती है।

4. खुद को परखने का वक्त

चांद रात वह संधि है जहां रमजान की पाबंदियां खत्म होती हैं और आम दिनों की शुरुआत। यह रात हमें यह सिखाती है कि रमजान में सीखी गई नेकी और सब्र (धैर्य) को हम साल के बाकी 11 महीनों में कैसे बरकरार रखते हैं।

Story first published: Wednesday, March 18, 2026, 18:02 [IST]
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