Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
मिथुन संक्रांति का दिन माना गया है बहुत खास, जरुर पढ़ें इस दिन की विशेष कथा
मिथुन संक्रांति एक शुभ दिन है जब सूर्य देव वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। मिथुन संक्रांति या राजा पर्व को पूर्वी भारत में अशरह, केरल में मिट्ठूम् और भारत के दूसरे राज्यों में इसे आनी कहा जाता है। सूर्य का यह गोचर बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे साल में 12 संक्रांति होती है लेकिन इनमें से चार संक्रांति को बेहद शुभ बताया गया है जिनमें मिथुन संक्रांति शामिल है।

मिथुन संक्रांति कथा
इस दिन के साथ जुड़ी विशेष कथा के मुताबिक, प्रकृति ने महिलाओं को मासिक धर्म का वरदान दिया है। इसी वरदान से महिलाओं को मातृत्व का सुख मिलता है। मिथुन संक्रांति कथा के अनुसार जिस तरह महिलाओं को मासिक धर्म होता है वैसे ही भूदेवी या धरती माता को शुरुआत के तीन दिनों तक मासिक धर्म हुआ था और इसे धरती के विकास का प्रतीक माना जाता है। तीन दिनों तक भूदेवी मासिक धर्म में रहती हैं। चौथे दिन में भूदेवी जिसे सिलबट्टा भी कहते हैं उन्हें स्नान कराया जाता है। इस दिन धरती माता की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में आज भी भगवान विष्णु की पत्नी भूदेवी की चांदी की प्रतिमा विराजमान है।

मिथुन संक्रांति पूजा विधि
मिथुन संक्रांति के दिन सिलबट्टे को भूदेवी के रूप में पूजा जाता है। सिलबट्टे को इस दिन दूध और पानी से स्नान कराया जाता है। इसके बाद इस पर चंदन, सिंदूर, फूल और हल्दी चढ़ाया जाता है। इस दिन पूर्वजों को भी याद किया जाता है। घर घर में गुड़, नारियल, चावल के आटे व घी से बनी मिठाई तैयार की जाती है। इस दिन चावल ग्रहण करने की मनाही होती है।

मिथुन संक्रांति का महत्व
ओडिशा में मिथुन संक्रांति का पर्व काफी उत्साह से मनाया जाता है। इसे स्थानीय लोग राजा परबा के नाम से बुलाते हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की लोग खुशियां मनाते हैं और साथ ही बरसात का स्वागत करते हैं। यह महिलाओं को समर्पित पर्व है। अविवाहित लड़कियां सुंदर पोशाक और गहने पहनती हैं। विवाहित महिलाएं भी इस दिन पूरा श्रृंगार करती हैं और घर के कामों से छुट्टी लेती हैं। उत्सव के दौरान राजा गीत गाया जाता है। यह प्रकृति से जुड़ा त्योहार है।



Click it and Unblock the Notifications