अर्थ नहीं

No Interpretation
एक बार अध्यात्मिक गुरू बोकुजू एक गाँव में सड़क पर चल रहा था। कोई व्यक्ति आया और उसने उसे लाठी से मारा। गुरू नीचे गिर गए और वह छड़ी भी नीचे गिर गई जिससे उस व्यक्ति ने उन्हें मारा था। गुरू तुरंत अपने पैरों पर खड़े हो गए और उन्होंने छड़ी को उठा लिया। उस आदमी ने जब गुरू को छड़ी के साथ खड़े हुए देखा तो वह भागने लगा। गुरू छड़ी के साथ उस व्यक्ति का पीछा करने लगे और चिल्लाये, "प्रतीक्षा करो, अपनी छड़ी अपने साथ ले जाओ!"

अंततः बोकुजू ने उस आदमी को पकड़ लिया और उसे उसकी छड़ी दे दी। इस बीच भीड़ जमा हो गई और भीड़ में से एक आदमी ने बोकुजू से पूछा, "उस आदमी ने आपको इतना मारा और आपने उसे कुछ नहीं कहा!"

बोकुजू ने कहा, "सच सच है, उसने मारा उतना बस है। यह हुआ कि वह मारनेवाला है और मुझे मारा गया है। यह वैसा ही है जैसे कि मैं एक वृक्ष के नीचे से जा रहा हूँ और एक शाखा गिर पडी है। मैं क्या करूँगा? मैं क्या कर सकता हूँ?

फिर भी भीड़ कहती रही कि शाखा तो शाखा है परंतु यह तो एक आदमी है। हम शाखा को फटकार नहीं सकते। हम वृक्ष को यह नहीं कह सकते कि यह बुरी बात है क्योंकि वह ‘वृक्ष' है और उसके पास बुद्धि नहीं है।

Story first published: Friday, September 28, 2012, 17:58 [IST]
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