सोयेन साकू के नियम

Soyen Shaku's Rules
सोयेन साकू, पहले जैन गुरू थे जो अमेरिका जा रहे थे। वह कह रहे थे- मेरा दिल,आग की तरह जल रहा है लेकिन मेरी ऑखें ऐसे ठंड़ी हो रही है जैसे मृत राख हो।

उसने निम्‍मलिखित नियम बनाए और कड़ाई से पालन करने को कहा। सुबह धूप के प्रकाश में तैयार होने से पहले ध्‍यान लगाना। एक नियमित समय पर सेवानिवृत्‍त और थोड़े- थोड़े अंतराल पर भोजन लेना। उचित खुराक लेना न कि सन्‍तुष्‍ट होने तक खाना।

किसी मेहमान का इस रवैये से सत्‍कार करना जैसे आप अकेले हैं और अकेले होने पर ऐसा रवैया रखना जैसे आप मेहमान का सत्‍कार कर रहें हों। हमेशा अभ्‍यास करें कि आप क्‍या देख रहें है और अपने कहें हुऐ शब्‍दों को देखें।

किसी भी अवसर को गुजरने न दें लेकिन कुछ भी करने से पहले दो बार सोचें। कभी भूतकाल को न कोसें। भविष्‍य के बारे में सोचें। अपना रवैया एक अभिनेता की तरह रखें और दिल एक बच्‍चें के जैसा।

जब अपने बिस्‍तर पर जाओ तो ऐसे सोओ जैसे यह आखिरी नींद हो। जागने पर अपने बिस्‍तर को तुरन्‍त छोड़ दो जैसे तुमने अपनी पुरानी चप्‍पलों को पहना हों।

सोयेन साकू के नियमों को सफलता के मंत्र कहा जाता है।

Story first published: Thursday, October 18, 2012, 16:33 [IST]
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