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अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार नये वर्ष की शुरुआत हो चुकी है, और नये साल के सभी व्रत और त्यौहारों की भी। एकादशी के व्रतों को सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। नये साल की पहली एकादशी वैकुण्ठ एकादशी पड़ने वाली है जिसे पौष पुत्रदा या मुक्कोटी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है जिससे मृत्यु के पश्चात् मोक्ष की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं इस महत्वपूर्ण एकादशी के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारें में -

वैकुण्ठ एकादशी की तिथि एवं मुहूर्त
पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को वैकुण्ठ एकादशी मनाई जाती है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 जनवरी को शाम 04:49 बजे होगा और अगले दिन यानि 13 जनवरी को शाम 07:32 बजे तक चलेगी। वैकुंठ एकादशी के दिन शुभ योग दोपहर 12:35 बजे तक का है। ऐसे में वैकुंठ एकादशी व्रत के लिए सुबह में पूजा करना उत्तम है।

वैकुण्ठ एकादशी का महत्व
मान्यताओं के अनुसार वैकुण्ठ एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वैकुण्ठ धाम का द्वार खुलता है। इस दिन व्रत एवं सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति होती है वैकुण्ठ धाम में श्रीहरि के चरणों में स्थान मिलता है। इसी दिन विशेष पुत्रदा एकादशी भी होती है, जिसके उपलक्ष्य में व्रत रखने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। निःसंतान की समस्या से जूझ रहे लोगों को इस एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए।

पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर मंदिर की सफाई करें और मंदिर सहित पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। भगवान को भी गंगाजल का स्नान कराएं। इसके बाद रोली, चन्दन, तुलसी के पत्तों और अक्षत का अर्पण भगवान को करें और फूलों से उनका श्रृंगार करें। वैकुण्ठ एकादशी की पूजा का प्रारम्भ भगवान गणेश की आरती के साथ करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। भगवान विष्णु को सात्विक भोजन का ही भोग लगाएं जिसमें तुलसी का अर्पण ज़रुर करें।

करें भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप
ॐ विष्णवे नम:।
ॐ नारायणाय नम:।
नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।



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