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कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। भगवान विश्वकर्मा दुनिया के पहले इंजीनियर और वास्तुकार माने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय की सभी राजधानियां भगवान विश्वकर्मा ने निर्मित की थीं।

कलाकार, शिल्पकार, बुनकर और उद्योग-व्यापार से जुड़े लोग कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। इस पूजा के दिन उद्योगों, फैक्ट्रियों एवं मशीनों की विशेष पूजा करने की परंपरा है। इस पूजा से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त-
चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर) : 11 बजकर 1 मिनट से
चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर) : 7 बजकर 56 मिनट तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर : सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व
ये पूजा खासतौर से कला, शिल्प और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए होती है। देवी देवताओं के समय के इंजीनियर माने गए भगवान विश्वकर्मा की पूजा से लोगों के काम-धंधे और व्यापर में वृद्धि होती है। जीवन में सुख समृद्धि के लिए लोगों को इस दिन जरूर पूजा करनी चाहिए, अवश्य लाभ मिलेगा।

विश्वकर्मा पूजा की विधि
विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को मंदिर में विराजित करें। आप सच्चे मन से भगवान की पूजा अर्चना करें। शादीशुदा व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ इस पूजा को करें। इनकी पूजा के लिए दीप, धूप, फूल, सुपारी, गंध, फल, मिठाई, दही, रक्षा सूत्र, भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा आदि की व्यवस्था करें। आप हाथ में पुष्प तथा चावल लेकर विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें और उनसे अपनी पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें। अपने सभी औजारों और मशीनों पर तिलक और अक्षत लगाएं। फैक्ट्री, ऑफिस या दुकान जहां भी आप पूजा करें, वहां मौजूद सभी लोगों के साथ आरती करके भगवान को भोग लगाएं। फिर सभी को प्रसाद बांटें।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा का मंत्र
भगवान विश्वकर्मा की पूजा में 'ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:', 'ॐ अनन्तम नम:', 'पृथिव्यै नम:' मंत्र का जप अवश्य करें। मंत्र के जप के दौरान रुद्राक्ष की माला रखें।



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