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शिव को गंगाधर क्यों कहा जाता है और इसका क्या अर्थ है
शिव और गंगा के साथ कई किवदंतियां जुडी हुई हैं। आइये इनमें से एक के बारे में जानें। हिन्दू धर्म जटिल कहानियों के माध्यम से हमें जीवन की वास्तविकताओं के बारे में बताता है।
शिव और गंगा के साथ कई किवदंतियां जुडी हुई हैं। आइये इनमें से एक के बारे में जानें। हिन्दू धर्म जटिल कहानियों के माध्यम से हमें जीवन की वास्तविकताओं के बारे में बताता है।
तितिक मूल्यों सहित इन कहानियों में बहुत गहरा अर्थ छुपा होता अहि। ऐसी ही एक कहानी शिवजी की है जिसमें बताया गया है कि उन्होंने अपनी जटाओं में गंगा को कैसे जकड़ा था।
शिव और गंगा के साथ कई किवदंतियां जुडी हुई हैं। आइये इनमें से एक के बारे में जानें:

जब राजा भागीरथ के दादा ने कपिल ऋषि पर अश्वमेघ यज्ञ का घोडा चुराने का आरोप लगाया तो वे उन पर क्रोधित हो गए। राजा भागीरथ ब्रह्मा को प्रसन्न करने में सफल हुए। घोडा वास्तव में इंद्र ने चुराया था जिन्हें इस बात का डर था कि यज्ञ करने के बाद सागर उनसे अधिक शक्तिशाली हो जाएगा।
कपिल ऋषि ने सागर तथा उसके वंशजों को को श्राप दिया और कहा कि जब तक वे पवित्र गंगा को स्वर्ग से धरती पर नहीं लायेंगे तब तक उन्हें मोक्ष नहीं मिलेगा।

भागीरथ की तपस्या से ब्रह्मा प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा को धरती पर उतरने के लिए कहा। परन्तु गंगा ने इसे अपना अपमान समझा और उसने आपनी ताकत से पृथ्वी का विनाश करने का संकल्प किया। ब्रह्मा जी गंगा के गुस्से से परिचित थे और उन्होंने भागीरथ से भगवान शिव की सहायता लेने के लिए कहा ताकि वे गंगा का सामना कर सकें।
भगवान शिव भागीरथ की सहायता करने के लिए तैयार हो गए। गंगा शिव की शक्ति से अनजान थी और उसने सोचा कि वह शिव को भी अपने साथ बहा ले जायेगी। परन्तु शिव तो देवों के देव हैं, उन्होंने अपनी जटाओं में गंगा को जकड लिया। गंगा को महसूस हुआ कि शिव कोई साधारण व्यक्ति नहीं है और वह शांत हो गयी।
छुपा हुआ अर्थ:
केवल एक स्थिर, मज़बूत और अजेय मन भौतिकवादी दुनिया के प्रलोभन को नियंत्रित कर सकता है। उसे कोई ललचा नहीं सकता। अत: सच्चाई को प्राप्त करने के लिए आपको अटल रहना चाहिए। स्थिरता से ही शांति और खुशी मिलती है।
अभिमान, गर्व और अहं को हराने के लिए आपको मज़बूत दिमाग की आवश्यकता होती है। इस कहानी में (गंगा का बल) अहं है और शिव मज़बूत दिमाग का प्रतीक है। क्योंकि शिव ने गंगा को धारण किया था अत: उन्हें गंगाधर भी कहा जाता है।



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