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Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें क्या कहता है विज्ञान और शास्त्र
Surya Grahan Me Pani Pi Sakte Hain Ya Nahi: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज यानी 17 फरवरी को लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण को अक्सर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार का सूर्य ग्रहण इसलिए भी खास है अमावस्या भी है जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) एक ऐसी घटना है जो जितनी खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण है, उतनी ही सांस्कृतिक रूप से भी चर्चित है। अक्सर ग्रहण के समय घरों में पानी के मटके ढक दिए जाते हैं या उनमें तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सूर्य ग्रहण के दौरान पानी पीना सुरक्षित है?
कई मान्यताओं में ये भी माना जाता है कि ग्रहण के दौरान खाना भी वर्जित होता है। लेकिन क्या यह सिर्फ परंपरा है या विज्ञान की भी कोई वजह है? खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं...

सूर्य ग्रहण में पानी पी सकते हैं या नहीं?
आज सूर्य ग्रहण है जिसे हिंदू धर्म में बहुत ही सवेंदनशील माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन हमारे आसपास नकारात्मकता बढ़ जाती है और इस दौरान किया गया कोई भी शुभ काम शरीर और मन पर बुरा असर डाल सकता है। ग्रहण के दौरान खासकर पानी पीने और भोजन करने के विशेष नियम होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण में पानी पीना वर्जित होता है और खाना खाना भी वर्जित होता है। यही वजह है कि ग्रहण से पहले खाने और पानी में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं ताकि पवित्रता बनी रहे।
शास्त्र और ज्योतिष में क्यों वर्जित है जल का सेवन?
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। इसलिए कुछ नियम बनाए गए हैं जो नीचे बताए गए हैं।
पाचन शक्ति पर प्रभाव
शास्त्रों का मानना है कि ग्रहण के दौरान सूर्य की जीवनी शक्ति (Prana) कम हो जाती है, जिससे हमारी 'जठराग्नि' (पाचन अग्नि) मंद पड़ जाती है। ऐसे में पानी या भोजन ग्रहण करने से अपच या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
सूतक काल के नियम
ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल में जल और भोजन को अशुद्ध माना जाता है। इसीलिए प्राचीन समय से ही ग्रहण के दौरान उपवास की सलाह दी जाती है।
तुलसी का महत्व
आयुर्वेद और शास्त्रों के अनुसार, जल में तुलसी का पत्ता डालने से उसकी शुद्धता बनी रहती है क्योंकि तुलसी में उच्च औषधीय और विद्युत-चुंबकीय गुण होते हैं।
क्या कहता है विज्ञान?
आपने धार्मिक दृष्टिकोण के बारे में तो जान ही लिया है अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में भी जान लेते हैं। दरअसल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक भौतिक घटना है, जिसका पानी की रासायनिक संरचना पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके बारे में विस्तार से नीचे जान लें-
संक्रमण का कोई खतरा नहीं
नासा (NASA) और दुनिया भर के वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहण के दौरान पानी जहरीला नहीं होता। चंद्रमा द्वारा सूर्य को ढकने से पानी के गुणों में कोई बदलाव नहीं आता।
डिहाइड्रेशन से बचें
विज्ञान का तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति को प्यास लगी है या गर्मी अधिक है, तो पानी न पीना शरीर के लिए नुकसानदेह (Dehydration) हो सकता है।
बैक्टीरिया का तर्क
कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों के अचानक कम होने से वातावरण में बैक्टीरिया थोड़े सक्रिय हो सकते हैं, लेकिन यह पानी को पीने लायक न छोड़ने जितना घातक नहीं होता।
इन लोगों के लिए नियमों में छूट
गर्भवती महिलाएं: जिन्हें शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति: जिन्हें नियमित अंतराल पर दवा या पानी की जरूरत होती है।
छोटे बच्चे: जिनके शरीर की मेटाबॉलिज्म दर वयस्कों से भिन्न होती है।



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