एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, 11,200 करोड़ में हुआ तैयार, जानें Jewar Airport से जुड़ी 10 बड़ी बातें

Asia's Largest Jewar Airport 10 Facts: आज 28 मार्च 2026 का दिन भारतीय विमानन इतिहास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में भव्य समारोह के बीच नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग ₹29,560 करोड़ के महाप्रोजेक्ट का पहला चरण ₹11,200 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन 'गति शक्ति' को साकार करते हुए, यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-NCR का बोझ कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य बनाकर एक ग्लोबल एविएशन हब के रूप में स्थापित कर चुका है। आइए आज हम जल्दी से जान लेते हैं जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 अहम बातें जो हर व्यक्ति को पता होनी चाहिए।

1. 11,200 करोड़ का भारी निवेश और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर

जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण (Phase-1) को पूरा करने में करीब ₹11,200 करोड़ खर्च हुए हैं। यह निवेश सिर्फ एक रनवे के लिए नहीं, बल्कि अत्याधुनिक टर्मिनल, एटीसी टावर और कार्गो हब के लिए किया गया है। स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट 'स्विस एफिशिएंसी' और 'भारतीय भव्यता' का बेजोड़ नमूना है।

2. सुरक्षा जांच के बाद 'ओपन-एयर कोर्टयार्ड' का अनुभव

जेवर एयरपोर्ट की सबसे अनोखी खासियत इसका ओपन-एयर कोर्टयार्ड है। आमतौर पर एयरपोर्ट्स बंद और एयर-कंडीशंड होते हैं, लेकिन यहां सिक्योरिटी चेक के बाद यात्री खुले आसमान के नीचे ताजी हवा का आनंद ले सकेंगे। यह डिजाइन लंबी उड़ानों से पहले यात्रियों को मानसिक शांति और ताजगी देने के लिए बनाया गया है।

3. ऊंची छतें और 'नेचुरल लाइट' वाला टर्मिनल

भीड़भाड़ के बावजूद यात्रियों को घुटन महसूस न हो, इसके लिए टर्मिनल की छतें काफी ऊंची रखी गई हैं। टर्मिनल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दिन के समय प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग हो सके। यह न केवल बिजली बचाता है बल्कि यात्रियों को एक सकारात्मक और ऊर्जावान माहौल भी देता है।

4. 100% डिजिटल और 'डिजी यात्रा' (Paperless Travel)

यह भारत का पहला पूर्ण डिजिटल एयरपोर्ट है। यहां एंट्री से लेकर बोर्डिंग तक फेस रिकग्निशन (DigiYatra) तकनीक का इस्तेमाल होगा। पैसेंजर्स को लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी; वे सेल्फ चेक-इन और बायोमेट्रिक गेट्स के जरिए मिनटों में अपना सफर शुरू कर सकेंगे।

5. मिक्स्ड-रोटेशन गेट्स: फ्लाइट्स होंगी सुपर फास्ट

भारत में पहली बार जेवर एयरपोर्ट पर मिक्स्ड-रोटेशन गेट्स की सुविधा दी गई है। इसका मतलब है कि एक ही गेट का उपयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों के लिए किया जा सकेगा। इससे जहाजों का 'टर्नअराउंड टाइम' कम होगा और उड़ानों में देरी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।

6. टर्मिनल में दिखेगी यूपी की संस्कृति

जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव भी है। टर्मिनल के अंदर 'ब्रज की गलियां' थीम पर आधारित सेक्शन बनाया गया है, जहां मथुरा-वृंदावन का पारंपरिक स्वाद और हस्तशिल्प देखने को मिलेगा। विदेशी सैलानियों के लिए यह भारत की पहली झलक होगी।

7. प्रीमियम लाउंज और लग्जरी रिलैक्सेशन

प्रीमियम और बिजनेस क्लास यात्रियों के लिए यहां वर्ल्ड-क्लास लाउंज बनाए गए हैं। यहां लाइव कुकिंग स्टेशन, कॉकटेल बार और स्पा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ट्रांजिट यात्रियों के लिए यह किसी 5-स्टार होटल जैसा अनुभव होगा, जहां वे अपनी अगली उड़ान का इंतजार आराम से कर सकते हैं।

8. मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी: मेट्रो से बुलेट ट्रेन तक

यह एयरपोर्ट कनेक्टिविटी का महासंगम है। यह सीधे यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल से जुड़ा है। भविष्य में इसे दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) और मेट्रो से जोड़ने की योजना है। एयरपोर्ट परिसर के अंदर यात्रियों के लिए 100% इलेक्ट्रिक टैक्सियां उपलब्ध रहेंगी।

Take a Poll

9. उत्तर भारत का सबसे बड़ा 'कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब'

जेवर एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि व्यापार के लिए भी क्रांतिकारी है। यहां का मल्टी-मोडल कार्गो हब (MMCH) उत्तर भारत के उद्योगों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ेगा। इससे पश्चिमी यूपी के उत्पादों (जैसे ओडीओपी - वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) का निर्यात बेहद आसान हो जाएगा।

10. 'नेट-जीरो एमिशन': भारत का सबसे 'ग्रीन' एयरपोर्ट

पर्यावरण के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, जेवर एयरपोर्ट को 'नेट-जीरो एमिशन' के लक्ष्य के साथ बनाया गया है। यह पूरी तरह सौर ऊर्जा पर चलेगा। यहाँ रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

उत्तर प्रदेश में कितने नेशनल और इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं?

इंटरनेशनल एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर)
महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट (अयोध्या)
चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट (लखनऊ)
लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट (वाराणसी)
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (कुशीनगर)

नेशनल एयरपोर्ट

प्रयागराज एयरपोर्ट (बमरौली)

कानपुर एयरपोर्ट (चकेरी)

गोरखपुर एयरपोर्ट (महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट)

आगरा एयरपोर्ट (खेरिया - इसे भी इंटरनेशनल बनाने का प्रस्ताव है)

हिंडन एयरपोर्ट (गाजियाबाद)

बरेली एयरपोर्ट

FAQs
जेवर एयरपोर्ट का कोड (IATA Code) क्या है?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आधिकारिक आईएटीए (IATA) कोड 'DXN' है।

जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली या नोएडा कैसे पहुँचें?

यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। यहाँ से 100% इलेक्ट्रिक टैक्सियां और शटल बसें उपलब्ध हैं। भविष्य में इसे मेट्रो और बुलेट ट्रेन (दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल) से भी जोड़ा जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट की यात्री क्षमता कितनी है?

पहले चरण में यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है। भविष्य के चरणों के पूरा होने पर यह क्षमता 7 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

BoldSky Lifestyle

Story first published: Saturday, March 28, 2026, 11:32 [IST]
Desktop Bottom Promotion