SHOCKING.. मजे के नाम पर यहां बिकते हैं रेप के वीडियो, कीमत सिर्फ 20 रूपए

कैसा लगेगा जब आपको मालूम चलेगा कि भारत के कुछ चुनिंदा जगहों पर खुलेआम रेप के वीडियो बेचे जा रहे हैं।

हम सब आए दिन रेप से सम्‍बंधित आर्टिकल के बारे में पढ़ पढ़कर थक‍ चुके हैं। पूरी दुनियाभर में रेप को रोकने के लिए कई तरह कानून बनाए जा रहे हैं, और दोषियों को कठोर दंड देना का प्रावधान है लेकिन जितना हम इस बारे में बात करते हैं। उतनी ही रोज इससे जुड़ी एक नई चीज सुनने को मिलती हैं।

आज भी हमारे देश में छोटी मानसिकता वालों के लिए रेप एक मनोरंजन का साधन बनकर रह गया है। ये हम नहीं कह रहे है ये हमारा पिछड़ा हुआ समाज और हमारी गिरी हुई सोच बता रही हैं।

कैसा लगेगा जब आपको मालूम चलेगा कि भारत के कुछ चुनिंदा जगहों पर खुलेआम रेप के वीडियो बेचे जा रहे हैं। जी हां आपने बिल्‍कुल सही पढ़ा, आइए जानते है आखिर कहां प्रशासन के नाक के नीचे ऐसे घाटिया काम को अंजाम दिया जा रहा है।

ब्‍लैकमेलिंग से शुरु होती है ये काहानी

ब्‍लैकमेलिंग से शुरु होती है ये काहानी

आम तौर पर, ये वीडियो बलात्कार पीड़ितों को ब्लैकमेल करने के लिए बनाये जाते हैं ताकि पुलिस थाने में उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज न करें। हालांकि, वे इसे वैसे भी इन दुकानदारों को बेचते हैं कभी-कभी, ये वीडियो उन लोगों के फोन से भी चुराए जाते हैं जो उन्हें फिल्म देते हैं। और जैसे ही कोई वीडियो एक व्यापारी तक पहुंचता है, यह व्हाट्सएप के

माध्यम से देश के दूसरे भागों में आग की तरह फैलता है।

उत्‍तर प्रदेश में ज्‍यादा

उत्‍तर प्रदेश में ज्‍यादा

रेप का वीडियो बनाकर बेचना यह धंधा उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बहुत तेजी से फल फूल रहा हैं। बलात्कार के वीडियो यहां आपको बड़े आसानी से मिल जाएंगे। अपने मोबाइल फोन में कुछ ही सेकंड में मिल सकता है।

स्‍थानीय फिल्‍मों के नाम पर मिलते हैं

स्‍थानीय फिल्‍मों के नाम पर मिलते हैं

ये वीडियो यहां "स्थानीय फिल्मों" के नाम पर यहां मिलते हैं। इन वीडियो की अवधि 30 सेकंड से लेकर 5 मिनट तक की होती है और राज्य के विभिन्न कियोस्क पर काउंटर के नीचे यह सब बहुत सावधानी के साथ बेची जाती हैं।

20 से 200 रुपए में मिल जाते है

20 से 200 रुपए में मिल जाते है

ज्‍यादात्‍तर दुकानदारों की मानें तो ये वीडियो उन्‍हें चुराकर मिलते है या किसी और के मोबाइल से मिलते है जिसके मोबाइल में ये वीडियो स्‍टोर होता है। इन वीडियों को वो 20 रुपए से लेकर 200 रुपए में बेचते हैं।

पुलिस का भी डर नहीं

पुलिस का भी डर नहीं

आश्‍चर्य की बात तो ये है कि पुलिस ने जब कभी ऐसे लोगों के यहां छापा मारा है वे जल्द ही जमानत पर छूट जाते है और फिर से वापस इस व्यापार में जुट जाते हैं।

जरा सोचिए.. पीडि़त का दर्द

जरा सोचिए.. पीडि़त का दर्द

हम सिर्फ इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि एक रेप पीडि़त को किन किन हालातों से गुजरना पड़ता है। पूरे जीवन किस दर्द में रहना पड़ता हैं। अब कल्पना कीजिए, पीड़ितों के साथ क्या होता है जिनके वीडियो बाजार में बेचे जा रहे हैं? यह एक जघन्य अपराध है, और सिर्फ जेल और जमानत न्यायसंगत नहीं है। इसके साथ निपटने के लिए सख्त सजा के प्रावधान के साथ एक ठोस कार्य योजना की आवश्यकता है।

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