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इन मौको पर हत्या करना नहीं है जुर्म, जानिए क्या कहता है भारतीय कानून
किसी इंसान को जान से मार देना कोई मज़ाक नहीं है लेकिन अगर आपके पास खुद को बचाने के लिए सामने वाले जो जान से मारने के अलावा और कोई रास्ता ही ना बचे तो इसे मर्डर नहीं बल्कि आत्मरक्षा कहा जाता है।
भारतीय कानून के अनुसार आईपीसी के तहत आप किसी भी इंसान को 5 तरह की परिस्थितियों जान से मारने का अधिकार रखते हैं।
आज हम आपको ऐसी ही 5 परिस्थितियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें किस को जान से मार देना मर्डर नहीं कहलाता है और इसमें किसी भी तरह की जेल या सज़ा भी नहीं होती है।

पहली परिस्थिति :
धारा 103 और 104 के तहत अगर कोई व्यक्ति आत्मसुरक्षा के लिए किसी की हत्या करता है तो उसे मर्डर नहीं कहा जाता है। खुद को किसी भी खतरे से सुरक्षित रखना आत्मसुरक्षा है।

दूसरी परिस्थिति :
अगर आप किसी के साथ हैं और अचानक से आपको महसूस होता है कि वो आपको नुकसान पहुंचाने वाला है तो ऐसी परिस्थिति में आप आत्मसुरक्षा के लिए उस पर हमला कर सकते हैं। हालांकि, इसे कोर्ट में साबित करना काफी मुश्किल होता है।

तीसरी परिस्थिति :
अगर किसी महिला या लड़की को अहसास होता है कि कोई उस पर हमला करने वाला है या उसका रेप करने वाला है तो वो आत्मसुरक्षा के लिए उस इंसान की जान तक ले सकती है। कोर्ट इस तरह के हमले को हत्या की श्रेणी में नहीं रखता है।

चौथी परिस्थिति :
अगर कोई महिला रेप की कोशिश के दौरान किसी पुरुष को काट लेती है और इस वजह से उसकी मौत हो जाती है तो से भी मर्डर नहीं आत्मसुरक्षा कहलाता है।

पांचवी परिस्थिति -:
अगर किसी व्यक्ति का अपहरण हो गया है तो वह व्यक्ति आत्मसुरक्षा में अपने अपहरणकर्ता पर हमला कर सकता है। अगर इस हमले के दौरान अपहरणकर्ता के गैंग में से किसी की मौत हो जाती है तो इसे हत्या नहीं कहा जाएगा।



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