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ऐसे पत्रकार जिनको सच लिखने के बदले मिली भयानक मौत, जानिए कौन थे ये कलम के सिपाही.....
जब हम निर्दोष लोगों की हत्या की कहानी सुनते हैं, तो यकीनन हमारा खून खौल उठता है। हमारे समाज में अगर हिम्मत करके कोई जुर्म के खिलाफ आवाज उठाता है तो उस आवाज को दफना दिया जाता है।
हत्याएं होती है और हम बिना कुछ कहे चुपचाप देखते रहते हैं और जमाना आगे बढ़ जाता है।
दुनिया भर के पत्रकारों के साथ क्या हो रहा है।
हर बार जब कोई पत्रकार किसी की असलियत सबके सामने लाता है और आवाज उठाता है, तो उसे मौत कि उस काली दुनिया में पहुंचा दिया जाता है जहां से वो कभी वापस नहीं लौटता।
आइए आपको बताते है कि कितने ऐेसे पत्रकार हैं जिनको सच लिखने के इनाम में मौत मिली है......

गौरी लंकेश
इस साइलेंट किलिंग की ताजा शिकार हुई गौरी लंकेश पैट्रिक की संपादक साहिबा, गौरी लकेश। वो अपनी बेबाक पत्रकारिता के लिए जानी जाती थी। उन्होने अपनी आखिरी राय राजनीतिक और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ पेश की थी।
कैसे हुई गौरी लंकेश की मृत्यु : अज्ञात लोंगो के द्वारा उनके घर के दरवाजे के पास गोली मारी गई।


संदीप कोठारी
संदीप कोठारी एक हिंदी दैनिक अखबार के संवाददाता थे जो जबलपुर के तहसील रिपोर्टर के पद पर काम कर रहे थे।
कैसे हुई मौत : संदीप ने अवैध खनन में शामिल तीन लोगों का पर्दाफास कर दिया था। जिसके बाद उनका अपहरण होता है और अगले दिन उनकी जली हुई लाश मिलती है।

राजदेव रंजन
राजदेव रंजन बिहार के सीवान में स्थित हिंदुस्तान डेली में काम करते थे।
कैसे हुई राजदेव की मौत : राजदेव को 0.9 mm की पिस्टल से बिल्कुल नजदीक से गोली मारी गयी थी।
एक गोली उनके गले में और एक माथे पर लगी थी। अस्पताल ले समय रास्ते में राजदेव ने दम तोड़ दिया था।

जगेन्द्र सिंह
जगेन्द्र सिंह स्वतंत्र पत्रकारिता करते थे। वो फेसबुक और अन्य सोशल वेबसाइट्स पर राजनीतिक और करेंट मामलों के बारे में लिखते थे।
कैसे हुई इनकी मौत : उनके घर में एक पुलिस का छापा पड़़ा था, जिसके बाद उनका जला हुआ शरीर मिला। उनके मृत शरीर में चोटों के निशान भी थे।

एम एम कलबर्गी
कलबर्गी जी एक भारतीय विद्वान और शैक्षणिक थे। उन्होंने हम्पी में कन्नड़ विश्वविद्यालय में कुलपति के तौर पर भी काम किया था। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होने मूर्ति पूजा की आलोचना कि थी और हिंदुओँ को उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की बात कही थी।
कैसे हुई मौत : अगस्त 2015 में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा इनके निवास पर इन्हें गोली मारी गई।

नरेंद्र दाभोलकर
नरेंद्र दाभोलकर एक अभियान में आगे रहे थे, जिन्होंने महाराष्ट्र सरकार को अंधविश्वास और काला जादू के खिलाफ बिल पारित करने के लिए प्रेरित किया था।
कैसे हुई मौत : अगस्त 2013 में अज्ञात हमलावरों द्वारा उन्हे गोली मार दी गई।



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