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जानिए, इस देश में वेडिंग गाउन लटका कर क्या कहना चाहती है महिलाएं ?
लेबनान की एक स्थानीय संस्था वर्ष 2014 में रेप को लेकर बनाए गए एक कानून का विरोध कर रही है। जिसमें बलात्कारी पीडि़ता से शादी करके सजा से बच सकता है।
अरब देशों की राजधानी की सड़कों से अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां सड़कों पर दुल्हन के कपड़े लटकते नजर आ रहें हैं। दरअसल, अरब के एक संस्थान जो महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज उठाती है, वर्ष 2014 में रेप को लेकर बनाए गए कानून का विरोध कर रही है।
संस्थान का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे रेप के घिनौने कृत्य को सरकार सफेद कपड़ों से ढक नहीं सकती है। इस कानून का विरोध न सिर्फ अरब देशों में किया जा रहा है बल्कि पूरे दुनिया भर में लोग इस कानून के विरोध में अपना समर्थन दे रहे हैं।

2014 में लागू हुआ था ये नियम
2014 में मोरोक्को ने एक ऐसा प्रावधान प्रस्तावित किया गया था, जिसमें आरोपी को बतौर सजा रेप पीड़ित से शादी करनी होगी। जिसके बाद लेबनान और जॉर्डन सरकार ने इस कानून को लागू कर दिया। अभी तक इस कानून के खिलाफ हजारों याचिका दायर हो चुकी है।


क्या है लेबनान में आर्टिकल 522 ?
लेबनान की एक स्थानीय संस्था 'आबाद' कानून लेबनीज पेनल कोड के तहत आर्टिकल 522 का विरोध कर रही है जिसके तहत बलात्कार करने वाला अपराधी पीडि़ता के साथ शादी करके मुकादमे और सजा से बच सकता है। इस एनजीओ ने एक मुहिम छेड़ी है जिसका नाम है "A White Dress Doesn't Cover the Rape". जिसके तहत वो इस कानून का पुरजोर विरोध कर रही है। जिसमें वो जगह जगह जाकर वेडिंग गाउन और इस मुहिम के लिए तैयार किया गया पोस्टर प्रचारित करके इस कानून को बंद करने की मांग कर रहा है।

पुरुषवादी सोच
सीरिया से लेबनान आए एक रिफ्यूजी परिवार की लड़की पीडि़ता बासमा मोहम्मद लतीफा के साथ तीन साल पहले दक्षिण लेबनान के एक गांव में एक व्यक्ति ने लतीफा के साथ रेप किया। उस शख्स की उम्र लतीफा के दोगुनी थी। लतीफा का परिवार पुलिस के पास नहीं गया, लोगों की बातों में आकर उन्होंने इस बात पर सहमति बना ली कि वह शख्स लतीफा से शादी करेगा। तीन साल तक रोज पीडि़ता के साथ वो शख्स घरेलू हिंसा किया करता था।
इस जून रजमान के दौरान आरोपी लतीफा के भाई के घर पर आया, जहां लतीफा रूकी हुई थी, और उसे नौ बार गोली मारी। लतीफा की मौत 22 साल की उम्र में हो गई। इसके बाद पीडि़ता के भाई ने इस कानून को एक घोटाला और गलत बताते हुए कहा था कि यह कानून पुरुषवादी सोच को दर्शाता है, जो महिलाओं को मात्र भोग का एक माध्यम समझता है।
दुनिया भर में विरोध
इस कानून का विरोध न सिर्फ अरब देशों में किया जा रहा है बल्कि पूरे दुनिया भर में लोग इस कानून के विरोध में अपना समर्थन दे रहे हैं। प्रोटेस्ट करके सोशल मीडिया के जरिए और याचिका दायर करके इस कानून को मानवीय अधिकारों के खिलाफ बता रहे है।



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