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'जहां टॉयलेट नहीं वहां शादी नहीं'.. यूपी की पंचायत का नया फरमान
हाल ही में ही रिलीज हुई फिल्म टॉयलेट एक प्रेमकथा में जहां लड़की शादी के बाद सुसराल छोड़कर चली जाती है क्यूंकि वो इस चीज को अपने मान सम्मान से जोड़ लेती हैं। इसी तरह बागपत के बिजवाड़ा गांव में सर्वसमाज पंचायत ने बेटियों के मान सम्मान को देखते हुए और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर बड़ा फैसला लिया गया।
पंचायत ने सर्वसम्मति से तय किया कि वह उस गांव में अपने बेटे या बेटी की शादी नहीं करेंगे, जो पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त न हो चुका हो। मतलब जिस घर में शौच नहीं होगा वहां शादी नहीं करेंगे। इस फरमान को जारी करने के बाद से ही देशभर में इस फैसले की चर्चा हो रही है।

पंचायत ने लिया बड़ा फैसला
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पंचायतें अधिकांश तौर पर विवादास्पद फरमानों के लिए जानी जाती हैं। बिजवाड़ा में हुई सर्वसमाज की पंचायत ने समाज के हित में फैसला लेकर यह साबित किया कि वे भी समय के साथ बदल रहे हैं। आए दिन हो रही घटनाओं को देखते हुए गांव वालों ने पंचायत बुलायी, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जिस गांव में शौचालय नहीं है, वहां बेटियों की शादी नहीं करेंगे और वहां की बेटियों की शादी अपने यहां नहीं करेंगे। नियम विरुद्ध जाने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

खुले में शौच मुक्त होना जरूरी
पंचायत मुखिया आत्माराम तोमर ने बताया कि पंचायत में 10 गांव के मुखिया शामिल थे। उन्होंने बताया कि पंचायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर बुलाई गई थी। इसमें निर्णय लिया गया कि कोई भी उस गांव में अपने बेटी या बेटे की शादी नहीं करेगा, जो खुले में शौच से मुक्त न हो।

फैसले के खिलाफ जाने पर वसूला जाएगा जुर्माना
पंचायत में इस बात को साफ साफ कहा गया कि पंचायत द्वारा लिए गए निर्णय का सख्ती से पालन कराया जाएगा। निर्णय मानने वाले परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया जाएगा।
और परिवार से जुर्माना वसूला जाएगा। इस पैसे से उस परिवार को शौचालय बनाने में मदद की जाएगी, जहां शौचालय नहीं होगा।

करेंगे जागरुक
इसके अलावा ये फैसला लिया गया आसपास के गांवों को इस फरमान से जोड़ा जाएगां साथ ही गांव-गांव जाकर स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरुक किया जाएगा।



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