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कैसे छा गया पूरे दुनिया में पटियाला पैग, जानिए इसकी पूरी हिस्ट्री
आइए जानते है पटियाला पैग की काहानी के बारे में कैसे पूरी दुनिया में पटियाला पैग मशहूर हो गया।
वैसे दुनियाभर में हिंदुस्तान की अपनी ही अलग छाप है। ऐसे कई महान अविष्कार और चीजें है जो हमारी देन है। लेकिन एक चीज ऐसी भी है जो पूरी दुनियाभर में मशहूर है। जिसका नाम लेते है हर आदमी के चेहरे पर हंसी आ जाती है।- वो है पटियाला पैग।
व्हिस्की की दिवानगी रखने वाले लोग पटियाला पैग पीकर एल्कोहल के लिए बनाए मापदंडों को तोड़ कर खुद को किसी योद्धा से कम नहीं समझते है। पंजाबी परिवारों, खासकर सरदार और जाट समुदायों में इस पैग का इस्तेमाल बहुत होता है। बॉलीवुड में कई सारे गाने भी इस पैग के नाम से फेमस हैं।
जिन परिवारों में व्हिस्की का चलन सामान्य सी बात है वो अपनी नेक्सट जेनरेशन को पैग मारना सिखाते हैं कि इसे कैसे बनाते और कैसे पीते हैं। आइए जानते है आखिर कैसे पटियाला पैग पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।

पटियाला पैग का इतिहास
वैसे तो पटियाला एक शहर है जो नेशनल हाईचे 1 पर स्थित राजपुरा नामक जगह से 24 किमी. दूर है और चंडीगढ़ शहर में बसा हुआ है। सारी दुनिया में इसी शहर के नाम से यह पैग फेमस है। पटियाला पैग के अलावा, पटियाला जूती और सलवार भी काफी फेमस है। लेकिन पूरी दुनिया इस शहर को पटियाला पैग के नाम से ही पहचानती है।

रॉल्स रॉयस को बना दिया कूड़ेदान
एक जमाने में और आज भी कई हद तक इसे शान-ओ-शौकत की चीज़ माना जाता है। इसे लेकर कई कहानियां कहीं जाती हैं। जिनमें से एक कहानी है कि पटियाला में 1891-1938 तक महाराजा भूपिंदर सिंह का शासन था। वो ही पटियाला पैग के जन्मदाता माने जाते है।
वे शाही जिंदगी पसंद करते थे। वो पहले शासक थे जिनके पास खुद का हवाई जहाज था, जो उन्होंने यूके से खरीदा था।
उनका अंदाज कितना शाही था वो इस बात से मालूम चलता है। एक बार उन्होंने जब रॉल्स रॉयस कम्पनी को नया ऑर्डर दिया और उसने उसे लेने से इंकार कर दिया तो राजा ने अपनी नई रॉल्स रॉयस को कूडेदान का ट्रक बनाने का आदेश दे दिया।

पटियाला पैग पीकर हार गई आयरिश टीम
माना जाता है कि भूपिंदर सिंह की एक खास पोलो टीम थी, जिसमें 8 सिख योद्धा थे। एक बार उन्होंने Irish टीम को खेलने के लिए बुलाया था। वहीं खेल से पहले शराब का प्रस्ताव रखा गया, तो विदेशी टीम ने अपनी क्षमता दिखाने के लिए ज्यादा पीना शुरू कर दिया। उसके बाद ज्यादा पी लेने की वजह से वो हार गए, उन्होंने कहा की पैग बड़े बनाए गए थे। तब राजा ने भी बताया कि पटियाला में पैग बड़े ही होते हैं।

ताकि लोग कर सकें इंतजार
कहा जाता है राजा भूपिंदर सिंह को आलीशन पार्टियां करने का बहुत चाव था। महाराज न सिर्फ आलीशान पार्टियों को आयोजित तो करते थे लेकिन वो पार्टियों में देर से आते थे। लेकिन सभी गेस्ट को समय पर ही आना पड़ता था जिसकी वजह से सभी को ये पैग दिया जाता था ताकि वो दो से तीन घंटे का वक्त बिता सकें। इस तरह पटियाला पैग का जन्म हुआ

कितना बड़ा होता है पटियाला पेग
माना जाता है कि पटियाला पैग या तो मध्यम या सबसे छोटी उंगली के बराबर बनाया जाता था। अगर पटियाला के बड़े बूढ़े से इस बारे में पूछेंते तो सभी एक बात कहेंगे कि पटियाला पेग 120 एम एल की बनाई जाती थी। लेकिन आजकल के पब में पटियाला पैग को 90 एम एल के तौर पर ही सर्व की जाएंगी। डबल औंस जोकि पश्चिमी देशों के अनुसार है।

पूरी दुनिया में पटियाला पैग नहीं मिलेगा
ज्यादात्तर लोग नहीं जानते है कि पटियाला पैग होता क्या है?, अगर आप न्यू ऑरलियन्स और स्पेन के किसी बार में इसे ऑर्डर करते है तो बार अटैंडेंस को समझ ही नहीं आएगा। दुनिया भर में एल्कोहल के जो स्टैंडर्ड मात्रा प्रचलित है वो है 30 एमएल. एक शॉट 44 एमएल का होता है। डबल 89 डबल का होता है। विदेशों में लोग पैग शब्द से भी वाकिफ नहीं है।



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