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सांता क्लॉस के बारे में मिथक
क्रिसमस का त्यौहार आते ही सबसे पहले सांता की याद आती है, गोलमटोल सांता, ढ़ेर सारे गिफ्ट लेकर आता है और हम सबको खुश कर देता है। क्रिसमस के दौरान आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, हर जगह सांता क्लॉस एक ही तरह से सजधज कर बच्चों के बीच खुशियां बांटता फिरता है। लेकिन बहुत कम ही लोग सांता के बारे में जानकारी रखते है, हममें से शायद ही किसी को पता हो, कि सांता कौन है, कहां से आया है और इतना लोकप्रिय कैसे हुआ। सांता के बारे में कई मिथक दुनिया भर में व्याप्त है, आइए जानते है ऐसे ही कुछ मिथक के बारे में : -

यह बात सच है या नहीं, ऐसा माना जाता है कि सांता देखने में सेंट निकोलस की तरह लगता है जो तीसरी सदी के सेंट थे। मायरा के पादरी एक अच्छे इंसान थे, जो बच्चों को तोफहें बाटतें थे। ऐसा भी माना जाता है कि पादरी ने अपने चमत्कार से तीन बच्चों को जीवनदान दिया था।
सांता क्लॉस के कपड़े किसने डिजाइन किए :
सांता के लाल और सफेद रंग के कपड़े सभी को आकर्षित करते है। सांता के पास लाल रंग का बड़ा थैला होता है जिसमें बच्चों के लिए तोफहें होते है। लेकिन आज तक पता नहीं चला कि सांता वास्तव में ऐसा था या उसके कपड़ों को बिजनेस के हिसाब से डिजाइन किया गया। इन दिनों सांता की ड्रेस एक ट्रेडमार्क बन चुकी है। हालांकि, आज भी हम मानते है कि सांता के कपड़े नार्थ पोल के लगते है।
सांता क्लॉस और उसका तरीका :
सांता क्लॉस, प्यार और स्नेह से लबरेज होते है। उनके दिल में बच्चों के लिए ढ़ेर सारा प्यार होता है। कई फिल्मों में हम सांता को हसंते हुए देखते है। 1890 में एक लेखक लुईस मोई ने एक किताब में सांता के बारे में बताया कि वह कैसे बच्चों के लिए तोफहों को खरीदकर उनमें बांटते है। इस किताब का नाम जुलेमंडेन्स बॉग है।
सांता के पास हिरन वाला स्लेथ है :
काफी लम्बे समय से लोगों के बीच यह बात प्रचलित है कि सांता अपने तोफहों को एक स्लेथ पर रखकर बांटते है जिसे हिरन चलाते है। ये बात सच है या सिर्फ कही सुनी बात, इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। लेकिन ऐसी कई कहानियां सुनने में आती है।
क्या सांता का क्रिसमस पर्व से कोई वास्ता है :
सांता सिर्फ क्रिसमस पर्व पर ही बच्चों को तोफहा देता है। क्रिसमस के दौरान भगवान ईशु का जन्म होता है, ईसामसीह और सांता का कोई कनेक्शन नहीं है। सांता की उत्पत्ति के बारे में किसी को पता नहीं, लोग मानते है सेंट निकोलस ही सांता का असल रूप हैं। सांता का चार्म पर्व के दौरान ही सबसे ज्यादा होता है।



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