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दुनिया की 5 सबसे पवित्र भाषाएँ
आपने पवित्र ग्रंथों तथा स्थानों के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी 'पवित्र भाषाओं' के बारे में सुना है? ये कोई अज्ञात भाषाएं नहीं हैं जिनसे आप और हम अनजान हैं बल्कि ये तो कई नई भाषाओं के जन्म का आधार रही हैं। इन भाषाओं में लिखे गए धार्मिक ग्रंथ तथा इनके उपयोग के आधार पर इन भाषाओं को पवित्र माना जाता है और अगर आप एक धार्मिक विद्वान है तो अब तक अंदाजा लगा ही चुके होगा।
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कैथोलिक ईसाइयों के लिए लैटिन एक पवित्र भाषा है क्योंकि उनकी सारी रस्में इसी भाषा में लिखी गई हैं। जबकि हिंदुओं की पवित्र भाषा संस्कृत है चूंकि उनके सारे मंत्र तथा ग्रंथ इसी भाषा में लिखे गए हैं। इसी तरह अन्य धर्म के लोगों की उनकी अपनी पवित्र भाषाएं हैं तथा आज हम आपको दुनिया की 5 सबसे पवित्र भाषाओं के बारे में बताएंगे।

1 हिब्रू
हिब्रू एक बहुत ही प्राचीन भाषा है जो अभी तक 'जीवित' है। ईसा मसीह की मृत्यु के बाद इस भाषा को बोलने वालों की संख्या घट गई तथा जिसके कारण इस भाषा को मृत भाषा घोषित कर दिया गया था। लेकिन 1947 में इसलाइल राज्य की स्थापना के साथ हिब्रू को इसलाइल की राष्ट्रीय भाषा के रुप में अपनाया गया। इस भाषा को जिन्दा रखने के लिए 40 लाख यहूदियों ने हिब्रू भाषा को बोलना तथा लिखना सीखा।

2 संस्कृत
संस्कृत भारत की सबसे पुरानी भाषा है तथा इसे कई भारतीय भाषाओं के जन्म का आधार भी माना जाता है। परंतु बोल-चाल के लिहाज़ से संस्कृत एक मृत भाषा बन गई है। हालांकि, आज इस बोली को धार्मिक समारोह में उच्चारण होने वाले श्लोकों एवं भजनों के माध्यम से सुना जा सकता है।

3 यूनानी
भले ही आज यूनानी भाषा का उपयोग सटीक रुप से नहीं किया जाता लेकिन यह विश्व की सबसे पुराने पवित्र भाषाओं में से एक है। बाइबिल का नया टेस्टामेंट यूनानी भाषा में लिखा गया था इसके अलावा गोस्पल सहित प्रथम ईसाई धर्म ग्रंथ भी इसी भाषा में लिखे गए हैं। आज भी यूनानी भाषा को ग्रीक की रुढिवादी चर्चों की मुख्य भाषा के रूप में प्रयोग किया जाता है।

4 लैटिन
जिस प्रकार यूनानी बाइबिल की भाषा है, उसी तरह लैटिन चर्च की भाषा है। रोमन कैथोलिक चर्च इटली में स्थापित होने के कारण, इटली की लैटिन भाषा चर्च की भाषा बन कई। बाद में, ईसाई धर्म के कुछ प्रमुख धार्मिक ग्रंथ इसी भाषा में लिखे गए हैं।

5 प्राचीन अरबी
इस्लाम धर्म के लोग, फ़ारसी व उर्दू के अलावा प्राचीन अरबी भाषा का उपयोग बोल-चाल की भाषा के रुप में करते हैं। कुरान एवं इस्लाम के अन्य धार्मिक ग्रंथों को प्राचीन अरबी भाषा में ही लिखा गया है। आज भी खाड़ी देशों में अरबी की विभिन्न बोलियां बोली जाती है, लेकिन ये कुरानी अरबी सी थोडी अलग हैं।



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