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खूबसूरत ताजमहल की अनोखी सच्चाई
द ताजमहल; प्यार की मिसाल माना जाने वाला दुनिया का अजूबा, भारत का गर्व है। इस अद्धुत स्मारक को सफेद संगमरमर से शाहजहां द्वारा उनकी बेगम मुमताज की याद में बनवाया गया था।
हर कोई ताजमहल देखने की इच्छा रखता है क्योंकि इसे मोहब्बत का मंदिर माना जाता है। यमुना नदी के तट पर स्थित यह स्मारक एक विस्मरणीय स्थल है।
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ताजमहल के बारे में आपको कई कहानियां और बातें सुनने को मिल जाएगी। ताजमहल के बारे में ऐसी ही कुछ निराली बातों को अब हम बताएंगे:

1.
शाहजहां ने अपनी तीसरी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल को बनवाने का निर्णय 1631 में लिया। मुमताज, बच्चे को जन्म देने के दौरान चल बसी थी। कहा जाता है कि शाहजहां कुछ ऐसा करना चाहते थे जो कभी किसी ने अपनी प्रियतमा के लिए न किया हों।

2.
ताजमहल को बनाने की शुरूआत 1632 में हुई और इसे बनाने में 22 साल का समय लग गया। कुल 22000 कलाकारों और चित्रकारों ने काम किया और 1653 में इसे बनाकर तैयार कर दिया। उस समय ताजमहल को बनाने में 32 मिलियन का खर्च आया था।

3.
ताजमहल के आर्किटेक्ट का नाम अहमद लाहौरी था। इसे बनाने में 1000 हाथियों को इस्तेमाल में लाया गया, जो पत्थर ढोने का काम करते थे।

4.
शाहजहां चाहते थे कि उनकी बेगम की याद में जो स्मारक बना है उसकी नकल कभी कोई न कर पाएं। इसलिए उन्होने कलाकारों के अंगूठों को कटवा दिया। लेकिन इसके बदले उन्होने भारी कीमत अदा की थी।

5.
इस स्मारक में एक मुख्य हॉलनुमा स्थल है जिसके चारों चार गुम्बदें हैं। पूरा ताजमहल संगमरमर से ही निर्मित है। 17 हेक्टेयर में बना यह स्मारक, बेहद सुंदर है जिसकी संरचना मुस्लिम धर्म के वास्तु के हिसाब बनाई गई है। कहते हैं कि इसमें लगा हुआ संगमरमर, राजस्थान, चीन, अफगानिस्तान और तिब्बत से आया था। 28 तरह के बेशकीमती पत्थर इसमें जड़े हुए हैं।

6.
ताजमहल में कई आयतों को लिखा गया है, जो कि अरबी भाषा में हैं। कैलीग्राफ का इस्तेमाल भी ताजमहल में देखने को मिलता है। अल्लाह के 99 विभिन्न नामों को ताजमहल में गुम्बद की ओर पत्थर पर उकेरा गया है।

7.
जिस तरह सफेद संगमरमर का ताजमहल शाहजहां ने अपनी बेगम के लिए बनवाया था, वैसा ही ताजमहल वह अपने लिए काले संगमरमर का बनवाना चाहते थे, वो भी नदी के उस पार। लेकिन उनके बेटे ने उन्हे ऐसा करने से रोक दिया और न मानने पर उन्हे बंदी बना लिया।

8.
ताजमहल का रंग, प्रदूषण और अन्य कारकों के चलते बदल सा गया है। सफेद से हल्का गुलाबी हो गया है। लेकिन ताजमहल के रंग पर चंद्रमा की रोशनी का प्रभाव भी पड़ता है, चंद्रमा की स्थिति के हिसाब से ताजमहल की रंगत बदलती रहती है। पूर्णिमा के दिन यह हल्का सुनहरा चमकता है।

9.
ताजमहल को 1857 में एक हमले में थोड़ा नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन लॉर्ड कर्जन ने इसे 1908 में दुबारा सही करवा दिया, क्योंकि तब तक इसे विश्व भर में ख्याति मिल चुकी थी।

10.
कहा जाता है कि ताजमहल, भगवान शिव के मंदिर के स्थान पर बनवाया गया है, जिसे राजा परमार देव ने बनवाया था और इसका नाम तेजो महालया था। इस मंदिर पर मुगल शासकों ने कब्जा कर लिया था और उन्होने अपने ढंग से इसे बनवाया। यह बात अभी तक रहस्य ही बनी हुई है लेकिन ताजमहल, अब दुनिया के अजूबों में से एक है और यहां साल लाखों पर्यटक सैर करने आते हैं।



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