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Babri Masjid की नींव के लिए ईंटें ले पैदल निकले शफीकुल इस्लाम, Viral Video ने मचा दी हलचल
Babri Masjid Viral Video: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान के बाद इलाके में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, आज बेलडांगा में मस्जिद की नींव रखी जानी है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक बाबरी मस्जिद की नींव के लिए ईंटें लेकर पैदल बेलडांगा पहुंचते हुए दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि वह उसी साइट की ओर बढ़ रहा है जहां मस्जिद का निर्माण प्रस्तावित है। आइए देखते हैं बाबरी मस्जिद के लिए ईंट ले जा रहे युवक का वायरल वीडियो और जानते हैं इस मस्जिद के बारे में विशेष बातें और कॉन्ट्रोवर्सी के बारे में।

वायरल वीडियो ने खींचा सबका ध्यान
बाबरी मस्जिद को लेकर पूरे देश में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन इस बार वजह राजनीति नहीं बल्कि एक युवक की आस्था और समर्पण है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के शफीकुल इस्लाम नाम के युवक बाबरी मस्जिद की नींव के लिए ईंटें लेकर पैदल यात्रा पर निकले दिखाई दे रहे हैं। कंधे पर बैग, हाथों में ईंट और आंखों में विश्वास इस वीडियो ने लोगों को भावुक भी किया और चकित भी। कहते हैं आस्था की कोई सीमा नहीं होती और शफीकुल इस्लाम ने इस बात को अपने सफर से सच साबित कर दिया है।
शफीकुल इस्लाम ने लोगों से की दुआ की प्रार्थना
वीडियो में देखा जा सकता है कि शफीकुल इस्लाम रास्ते में चलते-चलते लोगों से बाबरी मस्जिद के लिए दुआ और समर्थन भी मांग रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह ईंटों को मस्जिद की नींव का हिस्सा बनाने की नीयत से पैदल चल रहे हैं। उनकी यात्रा कई किलोमीटर लंबी है और वह बिना रुके लगातार अपने मकसद की तरफ बढ़ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कहीं इसे ईमान और मोहब्बत की मिसाल बताया जा रहा है तो कहीं लोग इसे धार्मिक प्रतीकात्मकता के रूप में देख रहे हैं।
हुमायूं कबीर की घोषणा से उठा विवाद
हुमायूं कबीर की इस घोषणा के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के अंदर भी मतभेद सामने आ रहे हैं। कई मुस्लिम उलेमा ने इस कदम का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह का कदम इलाके के माहौल को बिगाड़ सकता है और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। उलेमा का यह भी कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसा मुद्दा खड़ा करना सही नहीं है, खासकर ऐसे समय में जब सामाजिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है। दूसरी तरफ, मस्जिद निर्माण के समर्थक इसे धार्मिक अधिकार और ऐतिहासिक मुद्दे के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। नींव रखने की तैयारियों के बीच सुरक्षात्मक पहरा भी बढ़ा दिया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
6 दिसंबर से बाबरी मस्जिद का है खास नाता
बता दें कि 6 दिसंबर 1992 को ही बाबरी मस्जिद को गिराया गया था। आज 6 दिसंबर के ही दिन हुमायूं कबीर ने एक बार फिर इसकी नींव रखने की घोषणा कर दी है। दावा किया जा रहा है कि हुमायूं कबीर रैली निकालेंगे जिसमें करीब 3 लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे। ऐसे में भारी सिक्योरिटी का इंतजाम किया गया है। कहा ये भी जा रहा है कि सऊदी अरब से दो काजी भी आ रहे हैं।



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