The Origin of Gulab Jamun: इंडियन नहीं पर्शियन है गुलाब जामुन, जानें कैसे बना इंडियन कुजिन का ह‍िस्‍सा

जब भी क‍िसी मिठाई का नाम ल‍िया जाता है, तो जुबां पर सबसे पहले गुलाब जामुन का नाम आता है। आज किसी त्योहार या पार्टी-शादी के भोज की कल्पना गुलाब जामुन के बगैर नहीं की जा सकती है। सालों से गुलाब जामुन मिठाईयों के ल‍िस्‍ट पर पहले नंबर पर आता है।

लेक‍िन आपको सुनकर शायद धक्‍का लगेगा क‍ि भारत के हर फेस्टिवल में शान बढ़ाने वाला गुलाब जामुन असल‍ियत में इंडियन नहीं बल्कि पर्शियन कूजिन यानी ईरानी डिश का ह‍िस्‍सा है। जी हां, लेक‍िन प्रसिद्धि इसे भारत में आकर ही मिली।

ईरान में 13वीं सदी के आसपास मैदे से बनी गोलियों को घी में डिप फ्राय कर लेते थे। फिर इन्हें शहद या शक्कर की चाशनी में डुबोकर खाया जाता था।

The fascinating story of Gulab Jamun

उस समय वहां उसे 'लुक्मत अल-क़ादी' कहा जाता था। यही लुक्मत अल-क़ादी भारत में आकर 'गुलाब जामुन' बन गया। आइए जानते है इसकी पर्शिया (अब ईरान) से भारत आने तक के सफर के बारे में-

लुक्मत अल-क़ादी कैसे बन गया गुलाब जामुन

अब सवाल यह है कि पर्शिया से आई ये मिठाई लुक्मत अल-क़ादी भारत में आकर के कैसे गुलाब जामुन बन गया? तो इसे भी समझ लेते हैं। कुछ विद्वानों की मानें तो 'गुलाब' शब्द बना - 'गुल' और 'आब' से मिलकर बना है। गुल मतलब गुलाब और आब मतलब पानी। जिस समय यह भारत आया, उस समय कुछ लोग शक्कर की चाशनी को खुशबू देने के लिए उसमें गुलाब की पंखुड़ियां मिलाते थे। तो उसी से 'गुल' और 'आब' से यह गुलाब हो गया। जामुन जैसा आकार होने की वजह से यह व्यंजन कहलाने लगा 'गुलाब जामुन'।

शाहजहां के शासनकाल में बनी पहली बार

यह डिश तत्कालीन मुगल शासक शाहजहां की पसंदीदा हुआ करती थी। ऐसा माना जाता है कि गुलाब जामुन को बनाने का श्रेय शाहजहां और उनके बावर्ची को जाता है। कहा जाता है क‍ि एक बार शाहजहां के बावर्ची ने गलती से एक मिठाई तैयार कर दी थी और उसे बादशाह के आगे पेश कर दिया। यह तैयार मिठाई भारत में पहली बार मुगल शासन के दौरान बनाई गई। इस मिठाई को पर्शियन डिश 'लुकमत-अल-कादी' से प्रेरित होकर बनाया गया था। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, इस बारे में किसी को नहीं पता।

ये भी है एक काहानी

गुलाब जामुन से जुड़ी एक काहानी ये भी है क‍ि 1850 के अंत में कोलकाता के एक हलवाई भीम चंद्र नाग को गुलाब जामुन बनाने का श्रेय जाता है। एक बार की बात है क‍ि गवर्नर जनरल लॉर्ड चार्ल्स कैनिंग की पत्नी लेडी कैनिंग मिठाई बहुत पसंद करती थी, इसलिए भीम चंद्र नाग को गवर्नर जनरल लॉर्ड चार्ल्स कैनिंग (बाद में ब्रिटिश भारत के पहले वायसराय) की पत्नी लेडी कैनिंग के लिए एक खास मिठाई तैयार करने के ल‍िए कहा था।

इसी वजह से भीम चंद्र ने कुछ नया और अच्छा बनाने की कोशिश की। जिसके परिणाम में हलवाई ने गुलाब जामुन को आविष्‍कार क‍िया। जिसे खाने के बाद लेडी कैनिंग बेहद खुश हुई और तब इस मिठाई का नाम नहीं था। पहली बार इसे सिलेडरनुमा शेप में बनाया गया था। जिसके बाद इस मिठाई को कुछ समय के ल‍िए लेदिकेनी' कहना शुरू कर दिया। वायसराय की पत्नी ने आगे चलकर खास अवसरों और समारोह में इस मिठाई को जगह दिलाई।

Story first published: Friday, July 14, 2023, 21:59 [IST]
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