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रोना बच्चों के स्वास्थ के लिए क्यूं है अच्छा
नन्हें-मुन्नों का रोना किसे अच्छा लगता है, परंतु नन्हा शिशु रोता है तो कई बार रोता ही चला जाता है। बच्चे की हँसी जहाँ सबको प्रसन्न कर देती है, वहीं रोने की आवाज परेशान। विशेष रूप से माँ बेहद परेशान होती है, परंतु बच्चे तो रो कर ही अपनी बात को बताते हैं। भूख लगी हो तो रोना, नींद ना आने पर रोना, सूसू करने के बाद रोना, कपड़े पहनाने पर रोना, यह तो शिशु की दिनचर्या है।
यदि बच्चा रो रहा है तो आप सबसे पहले यह देखें कि यह क्यों रो रहा है। रोने पर आप उसे गोद में लें, प्यार करें, ज्यादातर तो यही होता है कि बच्चा माँ का स्पर्श पाना चाहता है, क्योंकि माँ की गोद में वह अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है, इसलिए आपके हाथों का स्पर्श पाते ही वह रोना बंद कर देता है। शिशु का रोना ही उसका अपनी माँ के साथ संपर्क करने का एक मात्र तरीका है, शिशु कई कारणों से रोता है। तो आईये जान कुछ ऐसे ही कारण

रोना बच्चों के स्वास्थ के लिए क्यूं है अच्छा
1. शिशु के पैदा होते ही रोना : इस आवाज़ को सुनाने के लिए पूरा घर बेसब्री से इंतज़ार करता है। क्यों कि यह किलकारियाँ आपको ज़िन्दगी के नए चरण में ले आती है। शिशु जब पैदा होते ही रोता है तो इससे उसके लंग्स पहली बार हवा में साँस लेते है, रोने से उसके लंग्स भी मज़बूत होते है। इससे बाद शिशु जब रोता है तो या उसे कोई परेशानी होती है यह किसी चीज़ की जरुरत। आपके शिशु के लिये कौन सा फूड है खतरनाक?
2. संपर्क बनाना : अगर आपका शिशु रोयेगा नहीं तो आप कैसे समझें गे की उसे किस चीज़ की जरुरत है, क्यों कि शिशु के रोने से ही आपको पता चलता है कि वह आप से कुछ कहना चाहता है। शिशु के रोने के भी तरीके होते हैं , जैसे वह कभी ज्यादा रोता है तो कभी कम, कुछ समय के बाद उनकी माँ भी समझने लगती है की उनके शिशु को किस चीज़ की जरुरत है। वह भूखा है या उसकी डायपर बदलने की जरूरत है, या उसे सर्दी की लग रही है। रोना ही शिशु के लिए एक मात्र तरीका जब वह अपनी बात को अपनी माँ को समझना सकता है।
3. शिशु की अच्छी सेहत के लिए : अगर आप अपने बच्चे की अच्छी तरह से देख-भाल कर रहीं है तो उससे भी लगता है की वह भी अकेला नहीं है। कभी कभी हमारे बड़े बुज़ुर्ग शिशु के रोने को नजअंदाज़ करने को कहते है जिससे उनमें अनुशासन पैदा हो, पर छोटे शिशु माँ के स्पर्श की जरुरत है ना की अनुशासन की। इससे शिशु अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है। जो शिशु प्यार और लगाव में पलटे हैं वह एक बेहतर व्यक्ति भी बनते हैं। उन बच्चों के मुकाबले जिनके रोने को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
4. मांसपेशियों के खिंचाव में मदद : जब शिशु रोते हैं, तो अक्सर उनकी मांसपेशियों में खिंचाव होता है। इससे उनकी मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिससे वह मजबूत होती हैं। एक तरह से देखें तो यह शिशु के लिए व्यायाम ही है, पर अगर यह रोना किसी दूसरे कारण से है तो उसे नज़र अंदाज़ न करे। और शिशु को बहुत देर तक रोने के लिए ना छोड़ें।
5. अति भावुकता को दूर करता है : अब यह आश्चर्य तो नहीं कि अगर आपका शिशु अति भावुक है ,तो वह रोने से कम हो जाएगी है। उनका रोना सिर्फ उस भावुकता को दिखाना है। यदि आपका शिशु आपके बहलाने पर भी चुप नहीं होता है तो उसे डाँटें, मारें या अकेला न छोड़े। अपने मन को शांत कर उसे चुप करवाने की कोशिश करें। इससे उसका चिड़चिड़ा दूर होगा और आप उनकी भावनाओं पर भी काबू कर पाएंगी।



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