Latest Updates
-
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना -
Happy Krishna Janmashtami 2026 Wishes: नंद के घर खुशियां आईं...जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर तुलसी तोड़ सकते हैं या नहीं? जानें क्या हैं धार्मिक नियम -
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 7 जगहें, दिखेगा कृष्ण भक्ति का खास रंग
प्री मैच्योर बेबी के लिए जीवनदान है 'कंगारु मदर केयर'
कभी कभी तय समय से पहले ही कुछ शिशु का जन्म हो जाता है। इस वजह से उनका वजन बहुत कम होता है और स्वास्थय की समस्या होती है। ऐसे समय में बच्चों की देखभाल करने के लिए उन्हें केमएसी दिया जाता है, मतलब ' कंगारु मदर केयर'।
कंगारू देखभाल एक ऐसी तकनीक है जो खासतौर पर अपरिपक्व ('प्री-टर्म') नवजात शिशुओं के लिए काफी मददगार होती है। इस तकनीक में शिशु के पैरेंट्स अपने अंग से लगाकर रखता है, ठीक वैसे ही जैसे कंगारू अपने शिशु को अपने करीब रखता है।
जैसे कंगारू अपने बच्चे को गर्माहट देकर उसकी आधी तकलीफें दूर करता है, ठीक ऐसे ही माएं भी अपने नवजात को अपने से चिपकाकर उसे गर्माहट देती हैं जिससे बच्चे की कई समस्याएं यूं ही दूर हो जाती है। इस तकनीक से जन्म से पूर्व में ही जन्में बच्चों के लिए का

बुखार के समय भी दी जाती है केएमसी
जब नवजात को ठंडा बुखार होता है उस दौरान नवजात को बुखार से बचाने के लिए केएमसी यानी कंगारू मदर केयर ट्रीटमेंट की सलाह दी जाती है। कंगारू देखभाल के दौरान बच्चे को केवल डायपर पहनाया जाता है। इस तकनीक के दौरान नवजात के सिर और गर्दन को इस तरह रखा जाता है कि उसको सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। कंगारू तकनीक के दौरान मां को एक गाउन या शर्ट पहनाई जाती है या फिर ऐसा कपड़ा पहनाया जाता है जो आगे की तरफ से खुला हो।

स्तनपान के दौरान भी
जब नवजात को मां की छाती से चिपकाया जाता है तो मां की सीने की गति और सांसों से बच्चे को गर्माहट मिलनी शुरू हो जाती है। कंगारू देखभाल की तकनीक को नवजात के पैदा होने के दो घंटे के बाद से लेकर लगातार चार-पांच दिन तक किया जा सकता है। नवजात के पैदा होने के 2 घंटे बाद स्तानपान की अवधि के दौरान भी नवजात के लिए कंगारू तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रखना होता है ध्यान
अपरिपक्व (प्री-टर्म) शिशुओं को दिन में कुछ घंटों के लिए कंगारू देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जब वे मेडिकल तौर पर स्थिर हो जाते है, तब इस तकनीक का समय बढ़ाया जा सकता है। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को, प्रतिदिन, कई घंटों के लिए अपने हाथों में रख सकते हैं। कंगारू देखभाल, यह नाम, उन मारसुपायल्स जानवारों से दिया गया है, जो उनके बच्चे को अंग के पास पकड़ते हैं।

बच्चे के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
कंगारू देखभाल प्री-टर्म बच्चों के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है। इससे बच्चे की हृदय गति सामान्य रहती है। जो माता-पिता अपने बच्चों को कंगारू देखभाल देते है। उनके बच्चे बेहतर नींद ले पाते हैं। माता-पिता के दिल की धड़कन सुनने से शिशुओं को आराम महसूस होता है। माता पिता भी कंगारू देखभाल के साथ अपने बच्चों से निकटता को महसुस करते है। नवजात बच्चे को हमेशा ढक कर रखें ताकि बदलते तापमान की वजह से बच्चे पर किसी तरह का कोई नुकसान न हो।



Click it and Unblock the Notifications