Latest Updates
-
Birthday Wishes for Boss: बॉस के बर्थडे पर भेजें ये खास और सम्मानजनक शुभकामनाएं, बोलें 'हैप्पी बर्थडे' -
पुरानी कब्ज और बवासीर से पाना है छुटकारा, तो इस पौधे की जड़ का करें इस्तेमाल -
वजन कम करने के लिए रोटी या चावल क्या है बेस्ट? करना है वेट लॉस तो जान लें ये 5 बातें -
दीपिका पादुकोण ने शेयर की सेकंड प्रेगनेंसी की गुड न्यूज, 40 की उम्र में मां बनना है सेफ -
Chardham Yatra करने से पहले पढ़ लें ये 5 बड़े नियम, इन लोगों को नहीं मिलेगी यात्रा की अनुमति -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 10 रुपये के नमक का ये टोटका, रातों-रात बदल देगा आपकी किस्मत -
Akshaya Tritiya Wishes: घर की लक्ष्मी को इन खूबसूरत संदेशों के जरिए कहें 'हैप्पी अक्षय तृतीया' -
Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद -
Parshuram Jayanti 2026 Wishes: अधर्म पर विजय...इन संदेशों के साथ अपनों को दें परशुराम जयंती की शुभकामनाएं -
Akshaya Tritiya 2026 Wishes: सोने जैसी हो चमक आपकी...अक्षय तृतीया पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
प्री मैच्योर बेबी के लिए जीवनदान है 'कंगारु मदर केयर'
कभी कभी तय समय से पहले ही कुछ शिशु का जन्म हो जाता है। इस वजह से उनका वजन बहुत कम होता है और स्वास्थय की समस्या होती है। ऐसे समय में बच्चों की देखभाल करने के लिए उन्हें केमएसी दिया जाता है, मतलब ' कंगारु मदर केयर'।
कंगारू देखभाल एक ऐसी तकनीक है जो खासतौर पर अपरिपक्व ('प्री-टर्म') नवजात शिशुओं के लिए काफी मददगार होती है। इस तकनीक में शिशु के पैरेंट्स अपने अंग से लगाकर रखता है, ठीक वैसे ही जैसे कंगारू अपने शिशु को अपने करीब रखता है।
जैसे कंगारू अपने बच्चे को गर्माहट देकर उसकी आधी तकलीफें दूर करता है, ठीक ऐसे ही माएं भी अपने नवजात को अपने से चिपकाकर उसे गर्माहट देती हैं जिससे बच्चे की कई समस्याएं यूं ही दूर हो जाती है। इस तकनीक से जन्म से पूर्व में ही जन्में बच्चों के लिए का

बुखार के समय भी दी जाती है केएमसी
जब नवजात को ठंडा बुखार होता है उस दौरान नवजात को बुखार से बचाने के लिए केएमसी यानी कंगारू मदर केयर ट्रीटमेंट की सलाह दी जाती है। कंगारू देखभाल के दौरान बच्चे को केवल डायपर पहनाया जाता है। इस तकनीक के दौरान नवजात के सिर और गर्दन को इस तरह रखा जाता है कि उसको सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। कंगारू तकनीक के दौरान मां को एक गाउन या शर्ट पहनाई जाती है या फिर ऐसा कपड़ा पहनाया जाता है जो आगे की तरफ से खुला हो।

स्तनपान के दौरान भी
जब नवजात को मां की छाती से चिपकाया जाता है तो मां की सीने की गति और सांसों से बच्चे को गर्माहट मिलनी शुरू हो जाती है। कंगारू देखभाल की तकनीक को नवजात के पैदा होने के दो घंटे के बाद से लेकर लगातार चार-पांच दिन तक किया जा सकता है। नवजात के पैदा होने के 2 घंटे बाद स्तानपान की अवधि के दौरान भी नवजात के लिए कंगारू तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रखना होता है ध्यान
अपरिपक्व (प्री-टर्म) शिशुओं को दिन में कुछ घंटों के लिए कंगारू देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जब वे मेडिकल तौर पर स्थिर हो जाते है, तब इस तकनीक का समय बढ़ाया जा सकता है। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को, प्रतिदिन, कई घंटों के लिए अपने हाथों में रख सकते हैं। कंगारू देखभाल, यह नाम, उन मारसुपायल्स जानवारों से दिया गया है, जो उनके बच्चे को अंग के पास पकड़ते हैं।

बच्चे के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
कंगारू देखभाल प्री-टर्म बच्चों के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है। इससे बच्चे की हृदय गति सामान्य रहती है। जो माता-पिता अपने बच्चों को कंगारू देखभाल देते है। उनके बच्चे बेहतर नींद ले पाते हैं। माता-पिता के दिल की धड़कन सुनने से शिशुओं को आराम महसूस होता है। माता पिता भी कंगारू देखभाल के साथ अपने बच्चों से निकटता को महसुस करते है। नवजात बच्चे को हमेशा ढक कर रखें ताकि बदलते तापमान की वजह से बच्चे पर किसी तरह का कोई नुकसान न हो।



Click it and Unblock the Notifications











