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कहीं आप का बच्चा तो नहीं कर रहा ऐसी हरकतें ? हो सकती है ये बड़ी बीमारी
एंटिसिपेटरी एंग्जायटी तब होती है जब लोग फ्यूचर में होने वाली किसी घटना के बारे में सोचते समय बढ़ती चिंता और तनाव का अनुभव करते हैं। आज के वक्त में ये बच्चों और किशोरों पर अधिक हावी हो रहा है। हालांकि ये एक अलग मानसिक स्थिति नहीं है। भविष्य की चिंता, डर और जेनरलाइज्ड एंजायटी डिसऑर्डर (जीएडी) सहित अन्य सिचुएशन का एक सामान्य लक्षण है। एक्सपेक्टेड टेंशन डर और चिंता को बुरी चीजों के बारे में बताती है जो हो सकती हैं। यह कई अलग-अलग रिफरेंस में हो सकता है, लेकिन ये आमतौर पर उन चीजों पर केंद्रित होता है जिनकी आप भविष्यवाणी या नियंत्रण नहीं कर सकते। इसमें सबसे अहम हैं बच्चों के व्यवहार को समझना, जिसे समझना मुक्शिल होता है। उनकी सोंच, वो क्या और कैसे करने वाले हैं, ये जल्दी नहीं पता चल पाता है। वहीं अगर बच्चा शांत रहने और कम बोलने वाला है तो ये और ज्यादा परेशानी से भरा हो सकता है। ऐसे में कई बच्चों में एंटिसिपेटरी एंग्जायटी हो जाता है जिसे पहचानना बहुत ही जरूरी होता है। 2018 की कई रिसर्च में विभिन्न टेक्नोलॉजी का यूज करने वाले बच्चों में इसका प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया गया है। यहां कुछ संकेत दिए गए हैं जेनरलाइज्ड एंजायटी डिसऑर्डर को दिखाता है-

कम आत्मसम्मान
ऐसे माहौल में बड़े होने वाले बच्चे जहां उनकी दूसरों बच्चों से अक्सर तुलना की जाती है, जो उनके आत्म-सम्मान को नुकसान पहुंचा सकता हैं। बच्चों में कम आत्म-सम्मान उनकी लाइफ में जारी रह सकता है। क्योंकि उनके अंदर लगातार खुद को दूसरे से अच्छा नहीं होने का डर बना रहता है।

कहीं फोकस ना कर पाना
इच्छा, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, या फोकस ना कर पाना जेनरलाइज्ड एंजायटी एक और संकेत है। यह एक नॉलेज फैक्स है कि चिंता और काम या स्कूल पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता संबंधित हैं। परेशानी या टेंशन शॉर्ट टर्म मेमोरी को भी खराब कर देती है, जिससे उन कामो या प्रोजेक्ट को याद करना मुश्किल हो जाता है, जो काम के प्रदर्शन के साथ कठिनाइयों को बढ़ा देते हैं।

क्या आप आत्म-आलोचनात्मक हैं
क्या आप या आपके बच्चे अपनी खामियों को देखते हैं या बिना किसी कारण के खुद की आलोचना करते हैं ? आत्म-आलोचना अत्यधिक सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर से संबंधित है। आप उन चीजों के लिए खुद को दोषी ठहरा सकते हैं जो आपके नियंत्रण से बाहर हैं।

सबसे अलग कर लेना
किसी सीमा में मन को शरीर से अलग करने के साथ-साथ विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को एक दूसरे से अलग करना है। उदाहरण के लिए, एक बच्चा एक दर्दनाक घटना को याद कर सकता है लेकिन स्मृति से जुड़ी कोई भावना नहीं है, या एक बच्चा चुनौतीपूर्ण व्यवहार का प्रदर्शन कर सकता है लेकिन व्यवहार में कोई स्मृति नहीं है।

खुद को दूसरे से जज किए जाने का डर
दूसरे बच्चे के बारे में क्या सोचते हैं, इस बारे में चिंता और डर से जूझना कुछ और नहीं बल्कि बच्चों को इस बीमारी की तरफ ढकेलना है। इससे बच्चों में सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है या खत्म होने लगता है। दूसरों की राय पर जोर देने से सोशल डिसऑर्डर हो सकता है।

चिड़चिड़ापन
जब व्यक्ति का शरीर और मन किसी परेशानी या टेंशन से भर जाता है, तो वे तनावग्रस्त और एनर्जी की कमी महसूस कर सकते हैं। बच्चे अपनी इस प्रॉबलम को चिड़चिड़ापन या क्रोध से दिखाते हैं।

जो टेक्नोलॉजी का ज्यादा यूज करते हैं -
बच्चो को चक्कर आना एक भयावह अनुभव हो सकता है जिससे आपकी चिंता बढ़ सकती है। चिंता एक फीडबैक लूप बना सकती है, जिससे चक्कर आने के लक्षण बढ़ सकते हैं। जो बच्चे टेक्नोलॉजी का ज्यादा यूज हैं, उनमें समस्याओं का अनुभव होने की संभावना अधिक हो सकती है, जिनमें शामिल हैं:
लो एकेडमिक परफॉर्मेंस
असावधानी
लो क्रिएटिविटी
भाषा के विकास में देरी
सामाजिक और भावनात्मक विकास में देरी
फिजिकल एक्टिविटी और मोटापा
खराब नींद की गुणवत्ता
सामाजिक मुद्दे, जैसे सामाजिक असंगति और चिंता
आक्रामक व्यवहार
इन तकनीकों की लत
उच्च बीएमआई
चिकित्सक से सहायता प्राप्त करें
अगर आप अपने बच्चे को खुद नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं को तो अपने चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर के पास जाकर या ऑनलाइन बात करके इस समस्या को सही करने का कोशिश करें, जो काफी महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रकार के पेशेवर आपके बच्चे को जेनरलाइज्ड एंजायटी डिसऑर्डर से निपटने में मदद कर सकते हैं।



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