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प्रसव के दौरान क्या होनी चाहिये पुरूष की भूमिका
प्रसव के दौरान स्त्री को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उसके पार्टनर को साथ में होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि सिर्फ वही एक ऐसा व्यक्ति होता है जो उसके उस दर्द को समझकर उसे उसके साथ बैठकर दिलासा दिला सकता है।
वैसे एक पिता भी अपनी बेटी को सराहा दे सकता है लेकिन शरीर के संवेदनशील भाग में दर्द की पीड़ा को पार्टनर बखूबी समझ सकता है। आइए जानते है कि प्रसव के दौरान पुरूष किस प्रकार मदद कर सकता है:

दिमाग हटाना: प्रसव के दौरान महिला को भयानक पीड़ा होती है। ऐसे में पुरूष उसका दिमाग कहीं भी भटका सकते हैं और उसके सहारा दे सकते हैं। अगर महिला चाहें तो वह उसे गाना सुनाकर या कोई भी हास्यापद हरकत करके उसका मन बहला सकता है।
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भावनात्मक सहारा: पुरूष के साथ होने पर महिला स्वयं को सुरक्षित मानती है और उसे खुद के और बच्चे के लिए भावनात्मक सहारा रहता है। उसका मन भी आंशकित नहीं रहता है।

धैर्य नहीं खोता: किसी भी पुरूष के साथ होने पर महिला स्वयं को सुरक्षित मानती है जिससे उसका धैर्य नहीं खोता है। प्रसव के दौरान सख्त से सख्त महिला भी लचर हो जाती है और उसे भी कोई ऐसा चाहिए जो उसकी बात और नखरे सहन कर लें।
प्रसव से आसानी से निपटने के पांच टिप्स
सहयोग देता है: पुरूष, प्रसव के दौरान महिला को सहयोग करता है। वह उसे चिंतामुक्त रखता है कि उसका और उसके बच्चे का भविष्य क्या होगा। वह हर स्थिति में महिला को सेट कर देता है और उसे किसी बात की परवाह नहीं करने देता है।

सपोर्ट सिस्टम: पुरूष, प्रसव से जूझने वाली महिला के लिए एक प्रकार का सपोर्ट सिस्टम होता है। जो उसे दिलासा देता है कि वह जल्दी ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी।



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