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मोटी गर्भवती महिलाओं को ख़तरा

मोटी महिलाओं में ढाई किलो से कम वज़न के शिशु को जन्म देने की लगभग दोगुनी ज़्यादा संभावना होती है. शिशु का ये वज़न औसत से कम माना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन में सभी जच्चा बच्चा इकाइयों के लिए ये बड़ा मुद्दा है. इस खोज को अमरीकन जर्नल ऑफ़ ओबस्टेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजी स्टडी में प्रकाशित किया गया है. शोधार्थियों ने इस पर और अध्ययन करने के लिए 208 अन्य महिलाओं के खून के नमूने लिए.
अधिक ख़तरा
जन्म के वक्त मोटी महिलाओं के 18.8 फ़ीसदी बच्चे औसत से कम वज़न के पाए गए. इसकी तुलना में सामान्य वज़न की महिलाओं के बच्चे स्वस्थ पाए गए. मोटी महिलाओं में समय पूर्व जन्म के इतने ज़्यादा मामले पाया जाना काफ़ी चिंताजनक है क्योंकि यह एक गंभीर समस्या है जिसमें कभी माता या भ्रूण की मौत भी हो सकती है
समय पूर्व जन्म का ख़तरा इसके अनुपात में बढ़ता गया कि अपनी गर्भावस्था में महिला ने कितना वज़न बढ़ाया.
इस शोध का नेतृत्व करने वाले किंग्ज़ कॉलेज अस्पताल और सेंट थॉमस अस्पताल के प्रोफ़ेसर लुसिला पोस्तोन का कहना है, " ऐसी महिलाओं में समय पूर्व जन्म के इतने ज़्यादा मामले पाया जाना काफ़ी चिंताजनक है क्योंकि यह एक गंभीर समस्या है जिसमें कभी माता या भ्रूण की मौत भी हो सकती है."
उनके अनुसार, " अब हमें मोटी महिलाओं की पहली गर्भावस्था को अलग समस्या मानना होगा. हम पहले ही जानते हैं कि यह कम वज़नी महिलाओं को मुकाबले ज़्यादा समस्या पैदा कर सकता है."
बच्चों के समय पूर्व और कम वज़न के जन्म से जुड़े ख़तरों में मस्तिष्क को नुक़सान, साँस लेने में कठिनाई, सीखने संबंधी समस्याएं और संक्रमण के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होना शामिल हैं.



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