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बीपी की दिक्कत में गर्भवती महिलाएं कैसे रखें ख्याल
गर्भावस्था, एक महिला के जीवन का विशेष चरण होता है। इस दौरान वह इस दुनिया में आने वाले अपने बच्चे को पेट में पालती है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई परिवर्तन होते है और बड़े - बड़े बदलाव आते है। गर्भवती महिला को कई प्रकार की शॉर्ट टर्म बीमारियां जैसे - गर्भावाधि मधुमेह, बीपी आदि हो जाती है।
गर्भावस्था के दौरान महिला का ब्लड़ प्रेशर गड़बड़ करता है। हालांकि कई महिलाओं में यह नॉमर्ल होता है लेकिन कई महिलाओं को इस वजह से काफी दिक्कत होती है। ब्लड़ प्रेशर में उतर - चढ़ाव की वजह से मां और बच्चे दोनों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। अगर किसी महिला को पहले से ही बीपी की समस्या है तो उसे गर्भ धारण करने से पहले कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बीपी की दिक्कत होने पर निम्म बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि वह और उनका बच्चा सुरक्षित रहें।

प्रीक्लेम्पसिया : गर्भावस्था के दौरान ब्लड़ प्रेशर का ज्यादा होना प्रीक्लेम्पसिया कहलाता है। इस स्थिति के निम्म कारण होते है।
1) रक्त वहिकाओं को नुकसान पहुंचना।
2) अस्वास्थ्यकर भोजन
3) गर्भाशय में उचित रक्त प्रवाह न होना।
4) बेकार प्रतिरक्षा प्रणाली
गर्भावस्था के दौरान बीपी की समस्या होने पर निम्म प्रकार की दिक्कतें हो सकती है :
1) गर्भावधि उच्चरक्तचाप : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में बीपी बढ़ जाने की समस्या को गर्भावधि उच्चरक्तचाप कहा जाता है। यह होने पर गर्भवती महिला की यूरिन में प्रोटीन नहीं रह जाती है और हाइपरटेंशन हो जाता है, इसीकारण बाद में प्रीक्लेम्पसिया हो जाती है।
2) 20 वें सप्ताह में बीपी : कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के 20 वें सप्ताह में बीपी की समस्या हो जाती है। यह एक प्रकार के हाइपरटेंशन होता है जो प्रसव के डर की वजह से होता है। प्रसव से 12 सप्ताह पहले बीपी में उतार - चढ़ाव होना सामान्य है।
3) सुपरइम्पोजिशन : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रीक्लेम्पसिया और क्रॉनिक हाइपरटेंशन का सुपरइम्पोजिशन होना सामान्य है। बीपी की समस्या होने पर गर्भ धारण करने वाली महिलाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा होती है। इस दिक्कत में महिलाओं की यूरिन में प्रोटीन, एक्यूमेलिटेड हो जाती है।
किन बातों का ध्यान रखना चाहिए : -
- गर्भवती महिला को बीपी की समस्या होने पर अपनी जीवन शैली में सुधार अवश्य लाना चाहिए। उसे शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए, टहलना चाहिए। अपने पार्टनर के साथ हर शाम को थोड़ा अवश्य टहलें।
- पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। तीनों टाइम भोजन करें। फूड चार्ट तैयार करें।
- बीपी को संतुलित बनाएं रखने के लिए कुछ खाद्य पदार्थो जैसे - लहसून आदि का सेवन करें।
- गर्भवती महिला को नियमित रूप से अपना ब्लड़ प्रेशर चेक करवाते रहना चाहिए और डॉक्टरी परामर्श लेते रहना चाहिए।
- गर्भावस्था के दौरान खुश रहें। दिमाग को शांत रखने के लिए ध्यान लगाएं। पूरी नींद लें और सभी नियमों का पालन करें। इस तरह गर्भावस्था में आप आसानी से अपना और अपने बच्चे का ख्याल रख पाएंगी



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