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जानें गर्भावस्था के 9 वें महीने में होने वाले बदलाव के बारे
गर्भावस्थ के दौरान हर महिला के शरीर में कुछ बदलाव होते हैं और कुछ के साथ नहीं। बदलाव गर्भधारण के दूसरे हफ्ते से दिखते हैं तो कुछ एक महीना पूरा हो जाने के बाद, और कुछ बदलाव गर्भावस्था के दौरान हर महीने में होते हैं।
लेकिन आज हम आप से गर्भावस्था के नौवे महीने में होने वाले बदलाव की बात करेंगें जो सबसे महत्वपूर्ण महीना होता है।

जानें गर्भावस्था के 9 वें महीने में होने वाले बदलाव के बारे
पेड़ू में दर्द
पेड़ू की तरफ आपके बच्चे का सर होता है, यही कारण है कि आपके पेट के निचले हिस्से और कमर के चारों ओर दर्द होता है। इसका एक कारण प्रसव भी हो सकता है।
REDA: गर्भावस्था के 9वें महीने में सावधानी बेहद जरूरी
स्तनों से बहाव
नौवे महीने में आपके स्तनों एक तरह का पीला पदार्थ निकलता हुआ दिखेगा, यह कोलोस्ट्रम है आपके बच्चे का पहला भोजन। इसे यह साबित होता है कि आब आप माँ बने के लिए तैयार हैं। तब तक आप ब्रैस्ट पैड इस्तेमाल कर सकती हैं।
वजाइनल डिस्चार्ज और स्पाटिंग
वजाइनल डिस्चार्ज यानी योनि से स्राव होना, यह किसी भी तरह के संक्रमण से बचता है साथ ही पीएच लेवल को भी संतुलित रखता है। स्पोटिंग यानी योनि का बड़ा होना यह प्रसव का एक कारण हो सकता है। साथ ही इसके और चिकित्सीय कारण हो सकते हैं। और अगर आपको स्पोटिंग के दौरान खून दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर मिले या हॉस्पिटल जाएँ।
किसी भी तरह का दबाव
इसे ब्रेक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्शन भी कहा जाता है, यह लगभग 30 सेकंड के लिए होता है और फिर रुक जाता है। लेकिन अगर यह 30 सेकंड से ज्यादा का हो और पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो तो तुरंत हॉस्पिटल जाए, यह प्रसव की निशानी है।

बच्चे का विकास
बच्चे की त्वचा: बाल की पतली परत जिसे लेनगो भी कहा जाता है जो आपके बच्चे की त्वचा को गर्भ में सुरक्षित रखती है निकल जाती है।
बच्चा सांस लेना सीखता है: जैसे जैसे आप प्रसव के करीब आती हैं बच्चा सांस लेना सीखता है। एमनियोटिक द्रव यह एक तरह का पदार्थ है जिसे बच्चा अपनी नाक से खींचता है और छोड़ता है। इसी के द्वारा बच्चा जब दुनिया में आता है तो सांस लेता है।
बच्चे की प्रतिरक्षा का विकास: आखरी के कुछ दिनों तक आपका बच्चा नाड़ी से भोजन ग्रहण कर रहा होता है जो उसकी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है जिससे वह उनसब बिमारियों से लड़ता है जो उसे इस दुनिया में आने के बाद हो सकती हैं। जन्म के बाद माँ का दूध भी बच्चे की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है।
बच्चे का जन्म
आखरी महीने में आपको ज्यादा सतर्क रहना है क्योंकि अब आपको किसी भी वक़्त प्रसव हो सकता है। इसलिए अपने आपको बिलकुल तैयार रखें, फिर चाहे आपकी नार्मल डिलिवरी हो या सीजेरियन हों, बच्चे की आने की ख़ुशी आपको के सारे दुःख को भुला देगी।



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