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रिश्तों में विश्वास कायम रखने के 6 तरीके
रातों रात किसी में विश्वास पैदा नहीं किया जा सकता है। दुसरे व्यक्ति में विश्वास जगाने में थोड़ा समय लगता है। जब विश्वास पैदा होता है तो उसका आदर करना जरुरी है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो जो विश्वास पैदा होने में काफी समय लगा है उसे टूटते हुए एक पल भी नहीं लगेगा।
खासकर, आप और अन्य व्यक्ति इस विश्वास को दोबारा कायम कर सकते हैं जब आप दोनों समय की नजाकत को समझे और एक दुसरे को समय दें। लेकिन दिमाग के पीछे आप अनेक संदेह रखते हैं। कई बार आप किसी में विश्वास खो देते हैं और निर्णय लेते हैं कि इसे दोबारा कायम करने का कोई महत्त्व नहीं है। इसके अलावा, आपमें विश्वास से सम्बंधित समस्या पैदा हो जाती है।
परिवार, मित्र, सहकर्मी, जीवन साथी, माता –पिता-बच्चा आदि अनेक ऐसे रिश्ते हैं जहाँ विश्वास एक तरफ़ा नहीं होता है। और यदि ऐसा होता है तो वह रिश्ता ज्यादा नहीं चलता है। इसलिए निम्न तकनीक आपके रिश्तों में विश्वास को मजबूत बनाये रखने में मददगार साबित होंगी।

आई कांटेक्ट - यदि आप मेरी तरह शर्मीले स्वाभाव के हैं तो आखें नहीं मिलाना स्वाभाविक है। हालांकि हमेशा शर्मीला होना ही कारण नहीं होता है। लोग इसलिए भी आखें छुपाते हैं क्यों कि दुसरे व्यक्ति की भावनाओं से अनजान होते हैं, या वे कुछ छिपाना चाहते हैं। इसलिए जब आप अपनी जिंदगी में कुछ नई शुरुआत करना चाहें या किसी में एक बार विश्वास टूटने के बाद दोबारा जोड़ना चाहें तो व्यक्ति की आखों में आखें डालकर बात करें। यदि आपके आखें मिलाने पर दूसरा व्यक्ति भी शांत बर्ताव के साथ आखें मिलाता है तो आप समझ सकते हैं इस रिश्ते में विश्वास की गुंजाइश है।
एक दूसरे को जानने की कोशिश करें - अक्सर युवा लोग कल्पना कर लेते हैं कि उनके पेरेंट्स फ्ला बात पर सहमत नहीं होंगे और वे विश्वास पैदा नहीं कर पाएंगे। ऐसा एक तरफ़ा सोचकर वे बातचीत के रास्ते ही बंद कर लेते हैं। ऐसा करने की बजाय पारिवारिक दिन स्थापित करें। ऐसे समय पर एक दूसरे से प्रश्न पूछें और विभिन्न मुद्दों पर एक दूसरे की पसंद - नापसंद से वाकिफ हों। एक दूसरे से खुलकर पेरेंट्स और बच्चे समझ पाएंगे कि वे आपसी दूरियों को कैसे मिटा पाएंगे। अपने रिश्ते की अहमियत को समझे और एक दूसरे पर विश्वास करने के लिए आश्वस्त रहें।
स्थिति का पता लगाएं - कोई भी जान बूझकर किसी का विश्वास नहीं तोड़ता है। लोग गलतियां करते हैं और बाद में महसूस करते हैं कि उन्होंने क्या कर दिया? रिश्ते को तुरंत तोड़ने की बजाय इस घटना के शांत होने का इन्तजार करें और फिर अपना पक्ष रखें और दूसरों का पक्ष सुनें। इस आपसी बातचीत में वह जो प्रतिक्रिया देता है उससे आप जान जायेंगे कि वह व्यक्ति सही है या नहीं। यदि व्यक्ति का बातचीत करने का तरीका लापरवाह सा है और माफी भी निष्ठाहीन सी है, तो जान लेना चाहिए की व्यक्ति को अपने किये का कोई पछतावा नहीं है।
अपने शब्दों पर रहें - हमारे रिश्ते में ऐसे अनेक लोग होंगे जो लगातार वादें करते हैं लेकिन उन पर कायम नहीं रहते। यदि हम उन्हें इस बाबत कहते हैं तो हर बार उनके पास एक बहाना या माफ़ी होती है। लेकिन यदि कोई आपकी अहमियत समझता है तो वह अपना वादा ध्यान जरूर रखेगा।
दिल से बात करना - परिवारजनों और दोस्तों की राय और सलाह दिल से आनी चाहिए। जब ऐसा होता है तो व्यक्ति कोमलता से मुद्दे की बात करता है और खुलकर करता है। उसे आपके भावनाओं की कद्र होती है।
सुधार के संकेत- यदि लोग बदलाव के बारें में वाकई ईमानदार हैं और वे आपका विश्वास पाना चाहते हैं तो वे सुधार का संकेत जरूर देते हैं। वे अपनी बात रखने की पुरजोर कोशिश करते हैं। वे हमेशा जरूरत के समय आपके साथ होते हैं। वे बार- बार एक ही गलती नहीं दोहराते हैं।
एक बार आप किसी का विश्वास तोड़ते हैं तो इसे दोबारा जोड़ने में बहुत समय लगता है। और कई बार तो यह विश्वास दोबारा कायम भी नहीं होता है। किसी भी रिश्ते के लिए विश्वास एक महत्त्वपूर्ण अंग है और इसे कभी नहीं तोडना चाहिए।



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