Real Story: उसने कई बार मेरे साथ की गंदी हरकत, मुझे मेरे घरवालों ने ही चुप करवा दिया!

मेरी दर्दनाक कहानी यही से शुरु होती है जब मैं नर्सरी में पढ़ा करती थी। मेरे पिता आर्मी में थे इसलिए हमारे घर में एक हेल्‍पर था जिसे हम बेटमैन कहा करते थे। एक दिन मेरी मम्‍मी ने उसे मेरे कमरे में मुझे डिनर पर बुलाने के लिए भेजा। यह पहली बार नहीं था कि वो मुझे डिनर पर बुलाने के लिए आया था, लेकिन ये पहली बार था जब उसने मेरे साथ गंदी हरकत की। उसकी इस हरकत से मैं हमेशा के लिए टूट गई। मैंने ये बात किसी को नहीं बताई क्‍योंकि मैं डरी और सहमी हुई थी मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अपना ये दर्द मैं कैसे और किसे बताऊं।

मासूम थी मैं..

मासूम थी मैं..

जब मेरे पिता को पोस्टिंग दूसरी जगह हुई तो वो बेटमैन भी हमारे साथ आया।

मुझे एक घटना और याद है जब वो मुझे स्‍कूल के बाद बस स्‍टॉप पर लेने आया था, उस वक्‍त मैं थर्ड क्‍लास की स्‍टूडेंट थी। बस स्‍टॉप घर से थोड़ा दूर था। वो मुझे वहां से सीधा अपने सर्वेंट क्‍वार्टर ले गया और व‍हां ले जाकर मेरे साथ गंदी हरकतें करना शुरु कर दिया।

मैं उस समय बहुत मासूम थी, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ क्‍या हो रहा है और क्‍यूं हो रहा है।

मैं उससे डरने लगी..

मैं उससे डरने लगी..

इसके बाद हम लाहौर से फिर से पिंडी वापस आ गए। अब भी वो अक्‍सर आया करता था, कभी कभी एक महीने में एक बार तो कभी कभी एक हफ्ते में ही आ जाया करता था। मेरे पिता अब रिटायर्ड हो चुके थे। अब भी वो मुझे छूने के तरीके ढूंढा करता था। मैं अब आठवीं क्‍लास में आ चुकी थी। मैं उससे अभी तक डरा करती थी। मैं उस वक्‍त तक कभी अपने परिवार से ये बात कहने में हिम्‍मत नहीं जुटा पाई।

मैं उस समय बहुत दुखी हो गई थी जब मेरे पिता रिटायर हो गए थे, हालांकि रिटायरमेंट से एक महीनें पहले मैंने मेरे मां और बड़ी बहन को इस बारे में बताया।

मुझे मालूम नहीं कि क्‍यूं उन्‍होंने इस बारे में खुलकर मेरे पापा से बात नहीं की। क्‍योंकि मेरे घरवाले मेरे अपराधी के परिवार को हमारे ही घर ले आए थे। अब वो लोग भी हमारे साथ रहने लगे थे, उसकी दो बेटियां थी, जिसे मैं भी प्‍यार करती थी मैंने कभी उन्‍हें घृणा की नजर से नहीं देखा।

मैं दोहरी व्‍यक्तित्‍व की जिंदगी जीने लगी थी...

मैं दोहरी व्‍यक्तित्‍व की जिंदगी जीने लगी थी...

जो भी हो उसने मेरे साथ जो भी किया उसकी वजह से मैं दोहरी व्‍यक्तित्‍व की जिंदगी जी रही थी। एक जो मैं सबके सामने थी, और एक वो जो एक अब्‍यूज विक्टिम है, जो रातों को उठकर बाथरुम में जाकर रोया करती थी। मैंने खुद को जख्‍म देने शुरु कर दिए और नींद को गोली खाने लगी। मेरे परिवार को वो जख्‍म भी मेरे शरीर में नहीं दिखा करते थे।

और फिर एक दिन

और फिर एक दिन

मैं इसी निराशा के भाव के साथ अब कॉलेज भी जाने लगी थी। मेरे सैकेंड सेमेस्‍टर में मेरी मां और उसकी पत्‍नी एक दिन बिना मुझे कुछ बताएं, वो दोनों बाजार चली गई थी। मैं मेरे रुम में सो रही थी। कुछ महसूस होने पर मेरी एकदम से आंखें खुली, मैंने देखा वो मेरे बिस्‍तर पर बेठा हुआ था। यह मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल था। मैंने उसे खींचकर थप्‍पड़ मारा और मेरे अपने रुम बाहर धकड़ने की पूरी कोशिश की। उसके बाद मैंने अपनी बहन को कहा कि मम्‍मी से घर जल्‍दी आने के लिए कहे। जैसे ही वो घर आई मैंने सबके सामने उसकी सच्‍चाई ला दी।

मेरी मां और बहन ने मुझे चुप करवा दिया..

मेरी मां और बहन ने मुझे चुप करवा दिया..

मैंने उसकी बीवी को भी समझाया, वो दिन मेरे लिए बहुत ही मुश्किल भरे थे। खुद को शांत रखने के लिए में दवाईयां खाने लगी ताकि मैं अपना कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर सकूं ताकि मैं अपने पिता के सामने सामान्‍य सी लगूं। मेरी बहन और मेरी मां ने मुझे मेरे पिता के सामने ये बात सामने लाने से मना कर दिया था। उन्‍हें डर था कि लोग क्‍या कहेंगे या सोसायटी क्‍या कहेगी?

खुद को नॉर्मल दिखाती थी

खुद को नॉर्मल दिखाती थी

उस दिन के बाद से उसने मेरे साथ घिनौना काम करना तो बंद कर दिया था लेकिन वो अभी भी बेशर्मों की तरह मेरे घर में रह रहा था, उस बात को अब दो साल हो गए थे। उसका चेहरा मुझे खुद पर घिन महसूस करवाता था, उसके हाथ भी। लेकिन में खुद को सामान्‍य महसूस करवाती थी , उसके उन्‍हीं गंदें हाथों से बना हुआ खाना खाती थी।

मेरे लिए सबसे बड़ा गम

मेरे लिए सबसे बड़ा गम

मैं मेरे पिता को बहुत प्‍यार करती हूं मैं हमेशा से जानती थी कि मैं अगर एक बार अपने पिता को बैटमेन के बारे में बता देती तो वो मेरा पूरा साथ देते। मेरी बहन और मां ने कभी इस बारे में जिक्र नहीं किया। वो अक्‍सर मुझसे कहते थे कि जीवन सबको किसी न किसी गम से गुजरना पड़ता है। मेरी जिंदगी मैं इससे बड़ा गम कोई और नहीं हो सकता कि मेरे ही मां और बहन ने मेरी आवाज दबा दी।

अब वो जा चुका है..

आज मैं बिना नींद की दवाईयों और खुद को जख्‍म पहुंचाए जी रही हूं। अब वो मेरे घर से हमेशा के लिए जा रहा है। मेरे पिता अब भी इस बारे में कुछ नहीं जानते है कि उनके अपने घर में उनकी बेटी के साथ क्‍या कुछ हुआ। क्‍योंकि इस घर की महिलाएं नहीं चाहती थी कि मैं अपने हक के लिए बोलूं।

Story first published: Friday, December 22, 2017, 15:58 [IST]
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