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उफ्फ.... ये पुरूष बात क्यों नहीं सुनते?
पुरूष कभी नहीं सुधर सकते। ये कहावत बहुत पुरानी है और कई मायनों में बिलकुल सही भी है। इनमें से एक प्रॉब्लम, पुरूषों का बात न सुनना भी है। बात न सुनने की आदत पुरूषों में उनके ईगों की वजह से होती है और वह दूसरों की सलाह को लेना पसंद नहीं करते है। एक प्राचीन कहावत है कि आप घोड़े को झील तक ले जा सकते है लेकिन उसे जबर्दस्ती पानी नहीं पिला सकते है, कुछ ऐसा ही पुरूषों के साथ है, आप चिल्लाकर या ऊंची आवाज में अपनी बात कह सकती है लेकिन उनके दिमाग तक अपनी बात को पहुंचा नहीं सकती है।
कई महिलाएं, अपने घर के पुरूषों की इस आदत से इतना परेशान हो जाती है कि कहना ही बंद कर देती है और वो जैसे होते है उन्हे वैसा ही स्वीकार कर लेती है। कई महिलाएं, पुरूषों की रूचि वाले क्षेत्रों जैसे - खेल या राजनीति में बात करना शुरू कर देती है ताकि इसी तरीके से वह आपकी बात सुनना शुरू कर दें। लेकिन पुरूष हमेशा पुरूष ही रहते है, अपनी दुनिया में खोए रहना ही उनकी फितरत होती है। लेकिन आप जो भी कहना चाहती है उसे पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ता से कहें और उस पर उनसे प्रतिक्रिया लेने की कोशिश भी करें।
कई बार ऐसा भी होता है कि पुरूष, शारीरिक रूप से घर में होते है लेकिन उनका दिमाग कहीं और होता है, अगर ऐसा है तो उन्हे सर्पोट करें और समझने की कोशिश करें कि क्या बात है। कई पुरूष एक साथ कई काम करने के कारण भी दूसरे की बात को इग्नोर कर देते है। ऐसे में उनकी गलती नहीं है क्योंकि हर कोई अपने परिवार को अच्छे तरीके से रखने के लिए ज्यादा पैसे कमाना चाहता है और इसके लिए ज्यादा काम करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन अधिकांशत: पुरूषों की बात न सुनने के निम्नलिखित कारण होते है :

1) महत्व न देना :
अगर आप किसी की बात न सुनें तो सबसे पहले दिमाग में यही आता है के वह इसांन आपकी बात को महत्व नहीं देता है। ऐसा पुरूषों के मामले में सही है। पुरूष कई बात के महत्व को समझते नहीं है और सुनना पसंद नहीं करते है। एक उम्र के बाद उनकी गर्लफ्रैंड या बीबी कुछ भी कहती रहें, उन्हे कुछ सुनाई ही नहीं देता है। किसी भी पुरूष में अच्छे श्रोता के गुण नहीं होते है।

2) समझ न पाना :
कई बार पुरूष, अपने काम में मग्न होता है लेकिन आपकी सुन रहा होता है। पर देखने में ऐसा लगता है कि वह आपकी बात को तबज्जों नहीं दे रहा है। पत्नी हो या माता - पिता, ऐसा कन्फ्यूजन सभी को हो जाता है कि उनका पति या बेटा उनसे सहमत नहीं रहता है।

3) भावनात्मकता :
पुरूष, महिलाओं की अपेक्षा कम भावनात्मक होते है। ऐसे में महिलाओं की मेलोड्रामा वाली बात सुनने में उन्हे मजा नहीं आता है। वह महिलाओं की भावना को समझते है लेकिन खुद उसी तरह से व्यक्त करने में असमर्थ होते है। इसलिए जब भी कोई इमोशनल बात होती है तो पुरूष, इग्नोर ही करते है।

4) आलोचना :
वैसे पुरूष हो या स्त्री, किसी को भी अपनी आलोचना अच्छी नहीं लगती है। सभी को अपने बारे में अच्छा सुनने की आदत होती है। लेकिन पुरूषों में एक गुण एक्ट्रा भी होता है कि उन्हे दूसरों की बुराई में ज्यादा मजा नहीं आता है। वह हमेशा आलोचना से दूर रहना चाहते है।

5) सही और गलत की सलाह को पसंद न करना :
पुरूषों को रास नहीं आता है कि उन्हे कोई सही और गलत की सलाह दे। आप उन्हे सलाह न दें, बाद में भले ही वह विफल हो जाएं। इसके अलावा, पुरूषों को यह भी पसंद नहीं है कि कोई उनकी विफलताओं का उदाहरण देकर बात सुनाएं।

6) पॉवर स्ट्रगल :
पुरूषों में ईगों होता है कि वह किसी भी स्थिति को संभाल सकते है, ऐसे में उन्हे किसी की सलाह लेना अच्छा नहीं लगता है। पुरूषों को किसी की बात न सुनना, उनके ईगो पर निर्भर करता है, जितना ज्यादा ईगो होगा, पुरूष उतना ही बात को कम सुनेगा।

7) तर्कसंगत बात का न होना :
पुरूषों का मानना है कि महिलाएं हमेशा बिना तर्क के बातें करती है, आज की बात वह 6 महीने बाद करती है। बात की पूंछ पकड़कर बैठे रहना उनकी आदत है, ऐसे में वह बात सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते है क्योंकि वो किस्तों में भी उस बात को पहले ही दस बार सुन चुके होते है।

8) परिणाम :
पुरूष किसी भी बात के परिणाम को सबसे पहले देखते है, बात को शुरू में सुनते है और फटाक से परिणाम को सोच लेते है। अगर बात उनके मतलब की नहीं होती है तो वह उसे नहीं सुनते है। इसीलिए, पुरूषों को टीवी सोपओपेरा आदि की बातें सुनने में मजा नहीं आता है।

9) बेवजह की बात :
अक्सर पुरूषों का मानना होता है कि औरतों या लड़कियों में दिमाग कम होता है, उन्हे व्यवहारिक ज्ञान कम होता है। ऐसे में वह उनकी बात को बचकाना मानकर सुनते ही नहीं है।



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