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तैलीय त्वचा के लिए सीरम- वरदान या अभिशाप?
वह पहली चीज़ क्या है जो आपके दिमाग में आती है जब आप चेहरे पर लगाए जाने वाले सीरम की बात करते हैं? वह सिर्फ एंटी एजिंग और मोस्चराइजिंग के लिए ही इस्तमाल में आती हैं। उनका टेक्सचर भारी होता है और वह महंगे भी होते हैं, और यह सिर्फ शुष्क चेहरे के लिए बने होते हैं।
प्रचलित विश्वास के विपरीत, सीरम चेहरे में त्वचा के अन्दर की सतह तक जाता है और यह हल्के लिक्विड होते हैं। हालांकि, इसके कई प्रकार बाज़ार में मौजूद हैं, कुछ सीरम होते हैं जो पानी के बेस वाले होते हैं।
यह सीरम हल्के, ना चिपकने वाले होते हैं और इनमें तेल को सोखने की क्षमता होती है, जिससे यह तैलीय त्वचा के लिए भी सही होते हैं।

सीरम और क्रीम:
सीरम और दूसरे क्रीम में सबसे बड़ा अंतर यह है कि सीरम में थिकनर नहीं होता है। इसमें ऐसी प्रभावकारी सामग्रियां होती हैं जो त्वचा में अन्दर तक जाती है और परिणाम अच्छा आता है।
सीरम कम वज़न वाले और नॉन-ग्रीज़ी होते हैं और इसलिए यह त्वचा के अन्दर जल्दी चले जाते हैं और त्वचा पर कोई निशान भी नहीं रहता। सीरम दूसरे क्रीम से ज़्यादा महँगा भी होता है। थोड़े से सीरम से ही आपके पूरे चेहरे की त्वचा पर असर दिखने लगता है। सीरम ज़्यादातर छोटे पंप बोतल में आते हैं जिससे उतना ही लिक्विड निकलता है जितने की ज़रुरत होती है। इससे सीरम की बर्बादी भी नहीं होती और इसका सही इस्तमाल भी हो जाता है। इसका मतलब है कि भले ही सीरम महंगे होते हैं, पर आपको हर महीने यह खरीदने की ज़रुरत नहीं होती और एक छोटी बोतल भी करीबन तीन महीने चल जाती है।

क्या सीरम तैलीय त्वचा के लिए सही होती है?
अब जब हमें यह पता चल चुका है कि सीरम असल में होता क्या है, चलिए देखते हैं कि क्या यह तैलीय त्वचा के लिए सही होती है।
तैलीय त्वचा में चेहरे पर काफी तेल जमा हो जाता है जिसे नियंत्रण में लाने की ज़रुरत होती है। कुछ सीरम में तेल को सोखने की क्षमता भी होती है जिससे आयल कण्ट्रोल कम होता है और चमक को कम करती है।
तैलीय त्वचा में कील मुहांसे होने की संभावना ज़्यादा होती है इसलिए उत्पाद नॉन-कोमेडोजेनिक होने चाहिए ताकि चेहरे पर पपड़ी ना पड़े। बाज़ार में मिलने वाले ज़्यादातर सीरम वाटर बेस वाले होते हैं जिससे वह नॉन-कोमेडोजेनिक बन जाते हैं। जब आप सीरम खरीद रहे हों तो यह जांच लें कि इसमें सैलिसिलिक और ग्लायकोलिक एसिड मौजूद हों क्यूंकि वह चेहरे पर पपड़ी नहीं पड़ने देते। इनसे सीबम के उत्पादन में भी कमी होती है।
तैलीय त्वचा पर जल्दी तेज़ रौशनी दिखने लगती है। इसलिए इसपर भारी नाईट क्रीम का इस्तमाल नहीं किया जा सकता है ताकि त्वचा की मरम्मत हो और वह फिर से जवान दिखने लगे। सीरम हल्के वज़न के और वाटर बेस वाले होते हैं जो इन्हें काफी प्रभावकारी बनाता है और इन्हें आराम से रात को इस्तमाल किया जा सकता है। एंटी- एजिंग सीरम से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़तीं।
सीरम त्वचा के लिए अमृत की तरह होती है। इनसे ज़्यादा फायदा लेने के लिए इन्हें टोनर लगाने के बाद और माईस्चराएज़र लगाने से पहले लगाना चाहिए। इससे यह त्वचा में अच्छे से सोख लिया जाता है।
अब जब आपको पता है कि सीरम तैलीय त्वचा के लिए भी कितना असरदार सिद्ध हो सकता है
तो आप किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं?
जल्दी से सीरम की एक बोतल खरीदें, अपनी चमकती त्वचा को दिखायें और लोगों को इसका राज़ समझने दें।



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