16 की उम्र में 20 साल बड़े आदमी से शादी, बेटा-बेटी की मौत का गम, दुखों से भरी थी आशा भोसले की जिंदगी

Asha Bhosle Life Struggles: बड़े दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि सुरों की दुनिया की 'लिविंग लीजेंड' आशा भोसले (Asha Bhosle) आज हमारे बीच नहीं रहीं। 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। आशा दुनिया के लिए एक ऐसी फनकार थीं जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज के पीछे अपने जिंदगी के दर्द को छिपा रखा था। खुद आशा ने अपनी बायोग्राफी 'Asha Bhosle: A Life In Music' में अपने उन जख्मों के बारे में बताया है जो कभी भरे ही नहीं, बल्कि नासूर बन गए जिन्होंने उन्हें ताउम्र दर्द दिया। अब आशा भोसले हमारे बीच में नहीं रहीं लेकिन अपनी मधुर आवाज के जरिए वो हमेशा जिंदा रहेंगी। चलिए आशा भोसले को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हैं और जानते हैं कैसे पति की प्रताड़ना से लेकर औलाद की मौत के गम तक को उन्होंने झेला लेकिन फिर भी अपनी आवाज की मधुरता के पीछे उसे छिपा दुनिया में संगीत का जादू चलाया। रोंगटे खड़े कर देने वाली है आशा की कहानी।

16 की उम्र में भागकर शादी और बहन लता से अनबन

आशा भोसले की पर्सनल जिंदगी के बारे में आप जानेंगे तो यकीनन आंखें नम हो जाएंगी। आशा ने सिर्फ 16 साल की उम्र में अपनी बहन लगा मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी कर ली थी जो उनसे उम्र में 20 साल बड़े थे। इस शादी से उनके परिवार वाले खुश नहीं थे तो आशा ने प्यार की खातिर उनसे नाराजगी मोल ले ही। सालों तक आशा और लता के बीच में बातचीत बंद थी।

जब प्रेग्नेंट होने पर भी पति उठाता था हाथ

आशा भोसले और गणपत राव में 20 साल का फासला था। आशा ने प्यार में पड़ अपने परिवार संग नाता तोड़ गणपत राव भोसले से शादी तो कर ली लेकिन उन्हें बाद में इसके लिए पछताना पड़ा। अपनी बुक में आशा ने खुद बताया है कि उनकी शादीशुदा जिंदगी किसी नर्क से कम नहीं थी। उनके पति शराब के आदी थे और छोटी-छोटी बातों पर आशा जी को बेरहमी से पीटते थे। ससुराल वाले भी उनपर जुल्म करते थे और हद तो तब हो गई जब जब वह प्रेग्नेंट थीं, तब भी उनके साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनके ससुराल वालों को उनकी सफलता से नफरत थी।

मौत को लगाना चाहा गले

आशा भोसले के जीवन में कई ऐसे उतार-चढ़ाव आए जिन्होंने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया। परिवार के खिलाफ जा गणपत से शादी कर आशा खुश रहना चाहती थी लेकिन ऐसा न हुआ और पति संग ससुराल वालों ने भी उनपर जुल्म किए। एक वक्त ऐसा आया जब आशा जी मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं। जब वह अपने तीसरे बच्चे (आनंद) के साथ 4 महीने की प्रेग्नेंट थीं, तब उनके ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। अस्पताल के बिस्तर पर अकेले लेटे हुए उन्होंने जिंदगी खत्म करने का फैसला किया और स्लीपिंग पिल्स की पूरी बोतल गटक ली। हालांकि उन्हें बचा लिया गया।

जवान बच्चों की मौत के वो जख्म जो कभी भरे नहीं

आशा जी ने अपनी आंखों के सामने अपने दो बच्चों को खोने का असहनीय दर्द झेला जो एक मां के लिए सबसे बड़ा दुख है। आशा भोसले की बेटी वर्षा भोसले ने साल 2012 में खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी। इसके बाद साल 2015 में बेटे हेमंत भोसले की कैंसर से जान चली गई।

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